बहू गई मायके, बुजुर्ग दंपति के बेटे पर भाभी को भगाने का आरोप लगाने का...
- 4h ago
जहां कई बुजुर्ग अपने ही परिवार की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं, वहीं मथुरा के तरुण शर्मा इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आए हैं। वर्षों से वे ऐसे बुजुर्गों को सहारा दे रहे हैं, जिन्हें उनके अपनों ने बेसहारा छोड़ दिया। इलाज से लेकर आश्रय और सम्मान तक, तरुण शर्मा उन्हें परिवार का प्यार देने का काम कर रहे हैं।
कहा जाता है कि माता-पिता भगवान का दूसरा रूप होते हैं, लेकिन जब वही माता-पिता अपने ही बच्चों के लिए बोझ बन जाएं, तो इससे बड़ी विडंबना कोई नहीं हो सकती। ऐसे ही बेसहारा और उपेक्षित बुजुर्गों के लिए मथुरा निवासी तरुण शर्मा आज किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
तरुण शर्मा पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भटक रहे लाचार और असहाय बुजुर्गों को तलाशते हैं। उन्हें सुरक्षित आश्रय दिलाना, समय पर भोजन उपलब्ध कराना, इलाज कराना और परिवार जैसा सम्मान देना उनकी सेवा का हिस्सा बन चुका है। इसी सेवा भावना के कारण लोग उन्हें आज "बेसहारों का बेटा" कहकर पुकारते हैं।
उनकी सेवा का सबसे भावुक उदाहरण सेठ सत्य प्रकाश की कहानी है। आरोप है कि बेटों ने उनकी संपत्ति अपने नाम कराने के बाद उन्हें घर से निकाल दिया। इसी दौरान वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे थे। जब उनकी खबर मीडिया में आई तो तरुण शर्मा उन्हें खोजते हुए पहुंचे, अपने संरक्षण में लिया, उनका इलाज कराया और लाखों रुपये खर्च कर बेटे की तरह हर कदम पर उनका साथ दिया। आज सत्य प्रकाश सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
ऐसी ही एक और मिसाल आगरा के एक बुजुर्ग की है, जिन्हें कथित तौर पर संपत्ति हड़पने के बाद परिजनों ने घर से निकाल दिया। तरुण शर्मा ने उन्हें भी सहारा दिया और आज भी उनकी आर्थिक सहायता, इलाज और अन्य जरूरतों का पूरा ध्यान रख रहे हैं।
तरुण शर्मा का कहना है कि माता-पिता की सेवा हर संतान का सबसे बड़ा धर्म है। उनका मानना है कि जो लोग अपने माता-पिता को प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसे मामलों में कठोर कानूनी प्रावधान लागू करने की मांग की है, ताकि कोई भी बुजुर्ग अपने ही घर में अपमान और उपेक्षा का शिकार न हो।
जहां कई बुजुर्ग अपने ही परिवार की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं, वहीं मथुरा के तरुण शर्मा इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आए हैं। वर्षों से वे ऐसे बुजुर्गों को सहारा दे रहे हैं, जिन्हें उनके अपनों ने बेसहारा छोड़ दिया। इलाज से लेकर आश्रय और सम्मान तक, तरुण शर्मा उन्हें परिवार का प्यार देने का काम कर रहे हैं। कहा जाता है कि माता-पिता भगवान का दूसरा रूप होते हैं, लेकिन जब वही माता-पिता अपने ही बच्चों के लिए बोझ बन जाएं, तो इससे बड़ी विडंबना कोई नहीं हो सकती। ऐसे ही बेसहारा और उपेक्षित बुजुर्गों के लिए मथुरा निवासी तरुण शर्मा आज किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं। तरुण शर्मा पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भटक रहे लाचार और असहाय बुजुर्गों को तलाशते हैं। उन्हें सुरक्षित आश्रय दिलाना, समय पर भोजन उपलब्ध कराना, इलाज कराना और परिवार जैसा सम्मान देना उनकी सेवा का हिस्सा बन चुका है। इसी सेवा भावना के कारण लोग उन्हें आज "बेसहारों का बेटा" कहकर पुकारते हैं। उनकी सेवा का सबसे भावुक उदाहरण सेठ सत्य प्रकाश की कहानी है। आरोप है कि बेटों ने उनकी संपत्ति अपने नाम कराने के बाद उन्हें घर से निकाल दिया। इसी दौरान वे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे थे। जब उनकी खबर मीडिया में आई तो तरुण शर्मा उन्हें खोजते हुए पहुंचे, अपने संरक्षण में लिया, उनका इलाज कराया और लाखों रुपये खर्च कर बेटे की तरह हर कदम पर उनका साथ दिया। आज सत्य प्रकाश सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। ऐसी ही एक और मिसाल आगरा के एक बुजुर्ग की है, जिन्हें कथित तौर पर संपत्ति हड़पने के बाद परिजनों ने घर से निकाल दिया। तरुण शर्मा ने उन्हें भी सहारा दिया और आज भी उनकी आर्थिक सहायता, इलाज और अन्य जरूरतों का पूरा ध्यान रख रहे हैं। तरुण शर्मा का कहना है कि माता-पिता की सेवा हर संतान का सबसे बड़ा धर्म है। उनका मानना है कि जो लोग अपने माता-पिता को प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल देते हैं, उनके खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से ऐसे मामलों में कठोर कानूनी प्रावधान लागू करने की मांग की है, ताकि कोई भी बुजुर्ग अपने ही घर में अपमान और उपेक्षा का शिकार न हो।
ब्रेकिंग न्यूज़, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट और ताज़ा वीडियो सबसे पहले पाएं
ब्रेकिंग न्यूज़, वायरल वीडियो और हर बड़ी अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर
Link copied successfully!