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Saturday, June 22, 2024

के.डी. हॉस्पिटल में ट्रांसरेडियल एंजियोप्लास्टी कर बचाई मरीज की जान

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवानंद पटेल ने ब्लॉक हुई धमनियों को किया सक्रिय

मथुरा — के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवानंद पटेल ने हाल ही में ट्रांसरेडियल एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के माध्यम से प्रकाश (58) निवासी ग्राम मानपुर, जिला पलवल (हरियाणा) की जान बचाने में सफलता हासिल की। मरीज को कार्डियोजनिक शॉक के साथ हार्ट अटैक आया था। डॉ. पटेल ने आधुनिकतम उपकरणों की मदद से 100 फीसदी ब्लॉक हुई धमनियों को खोलकर और स्टेंट लगाकर मरीज को हृदय रोग की समस्या से निजात दिलाई।
ज्ञातव्य है कि जिला पलवल (हरियाणा) निवासी प्रकाश को कार्डियोजनिक शॉक के साथ ही हार्ट अटैक आने के बाद के.डी. हॉस्पिटल के आकस्मिक चिकित्सा विभाग लाया गया। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवानंद पटेल ने मरीज की कुछ जांचें कराईं जांचों से पता चला कि उसे कार्डियोजनिक शॉक के साथ ही हार्ट अटैक हुआ है। आखिरकार परिजनों की सहमति के बाद डॉ. पटेल ने कुछ ही मिनटों में मरीज की ट्रांसरेडियल एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया से सफल सर्जरी करने में सफलता हासिल की। इस सर्जरी में डॉ. पटेल का सहयोग नर्सिंग आफीसर कैथ लैब राजेश शर्मा तथा कैथ लैब टेक्नीशियन सत्यपाल ने किया।
डॉ. पटेल का कहना है कि ट्रांसरेडियल एंजियोप्लास्टी एक आधुनिक चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर मरीज के हाथ की धमनी में छोटे से छेद के माध्यम से केवाली को प्रवेश कराते हैं तथा वहां से डिलिवरी सिस्टम में प्रवेश करते हैं। डॉ. पटेल ने मरीज की बंद हो चुकी धमनियों को सफलतापूर्वक खोला और स्टेंट जोड़कर उसमें स्थायी तंत्र स्थापित किया। इस प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति सामान्य होने के बाद उसे डिस्चार्ज कर आराम करने की सलाह दी गई। डॉ. पटेल बताते हैं कि ट्रांसरेडियल एंजियोप्लास्टी एक प्रभावी और उच्चतम सुरक्षा स्तर वाली प्रक्रिया है जो मध्य धमनी में स्टेंट की मदद से हृदय में ब्लॉकेज को संशोधित करती है। इस प्रक्रिया में हाथ में तार के माध्यम से स्टेंट को पहुंचाया जाता है, जो धमनी की दीवारों को स्थायी रूप से खोलता है तथा ब्लॉकेज को हटा देता है। इससे हृदय सामान्य तरीके से काम करना शुरू कर देता है।
डॉ. पटेल का कहना है कि अनेक मामलों में हार्ट अटैक जानलेवा होता है लेकिन इस अटैक के साथ अगर कार्डियोजनिक शॉक की समस्या भी उत्पन्न हो जाए, तो स्थिति और विकट हो जाती है। दिल जब रक्त को पम्प करने की शक्ति खो देता है, तो फिर ऑक्सीजनयुक्त रक्त नहीं मिल पाने की वजह से किडनी, लीवर और शरीर के दूसरे सभी जरूरी अंग भी अपने-अपने कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं। दिल के अलावा पीड़ित व्यक्ति के अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। फेफड़ों से दिल में पहुंचने वाला ऑक्सीजनयुक्त रक्त वापस फेफड़ों में लौटने लगता है। इस स्थिति में सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है और रक्तचाप एकदम कम हो जाता है। हार्ट अटैक के रोगियों में लगभग 10 प्रतिशत मामले कार्डियोजनिक शॉक से संबंधित होते हैं।
आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल, डीन और प्राचार्य डॉ. आर.के. अशोका ने सफल सर्जरी के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवानंद पटेल और उनकी टीम को बधाई दी है।
चित्र कैप्शनः मरीज प्रकाश और बाएं से हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवानंद पटेल और उनकी टीम।

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