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Friday, June 14, 2024

डॉ. देवेन्द्र पाठक अब जामिया हमदर्द डीम्ड यूनिवर्सिटी दिल्ली में भी देंगे सेवाएं

फार्मेसी शिक्षा को नया मुकाम देना है इनका लक्ष्य

फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले राजीव एकेडमी फॉर फार्मेसी के निदेशक एवं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश के डीन फार्मेसी डॉ. देवेन्द्र पाठक को जामिया हमदर्द डीम्ड यूनिवर्सिटी, हमदर्द नगर नई दिल्ली में अनुबद्ध प्रोफेसर डिपार्टमेंट आफ फार्मास्युटिकल केमेस्ट्री के पद पर नियुक्त किया गया है। अब डॉ. पाठक एक साथ तीन संस्थाओं में फार्मेसी शिक्षा को बढ़ावा देंगे।


जानकारी के अनुसार हाल ही में रजिस्ट्रार आफ जामिया हमदर्द डीम्ड यूनिवर्सिटी, हमदर्द नगर नई दिल्ली द्वारा छह पदाधिकारियों की नई नियुक्ति के आदेश दिए गए हैं जिसमें डॉ. देवेन्द्र पाठक भी शामिल हैं। डॉ. पाठक की जहां तक बात है इन्होंने फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में दर्जनों पुस्तकें लिखने के साथ इस विषय के विकास के लिए तन-मन से प्रयास किए हैं। डॉ. पाठक की सेवाओं को देखते हुए इन्हें दर्जनों राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। अपनी इस नियुक्ति पर डॉ. पाठक का कहना है कि यह एक शासकीय प्रक्रिया है, मुझे तो फार्मेसी शिक्षा को नया मुकाम देना है।


डॉ. पाठक की नियुक्ति पर आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल, प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल तथा राजीव एकेडमी फॉर फार्मेसी के प्राध्यापकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है। गौरतलब है कि देश में फार्मेसी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई ) काम कर रही हैं। डॉ. पाठक का कहना है कि फार्मेसी शिक्षा प्रगति पथ पर तेजी से अग्रसर है लेकिन देश में बेहतर गुणवत्ता वाले फार्मेसी शिक्षण संस्थानों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाई जाना चाहिए। इसके लिए उच्च फार्मेसी संस्थानों में स्नातकोत्तर शिक्षा तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ-साथ मान्यता तथा गुणवत्ता जैसे मानकों का निर्धारण भी अनिवार्य रूप से किया जाना जरूरी है।


डॉ. पाठक का कहना है कि वह भारत को एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त फार्मास्युटिकल केन्द्र बनते देखना चाहते हैं। आज भारत में फार्मेसी की शिक्षा को कई लोगों द्वारा व्यवसाय के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। देश के फार्मेसी कॉलेजों में योग्य तथा शिक्षित अध्यापकों की कमी है। इसके साथ ही फार्मेसी स्नातकों द्वारा प्राप्त ज्ञान तथा कौशल और रोजगार की आवश्यकताओं के बीच काफी विसंगतियां भी हैं। देश के फार्मेसी कॉलेजों के बीच वितरण की असमानता भी क्षेत्रीय असंतुलन तथा छात्रों के अंतरराज्यीय प्रवर्जन का प्रमुख कारण बना हुआ है।


डॉ. पाठक का कहना है कि ग्रामीण तथा दूरस्थ इलाकों में फार्मेसी कॉलेजों की अलोकप्रियता ने इस मुसीबत को और बढ़ाया है। इसके अलावा देश के कई फार्मेसी कॉलेज स्नातक टीम के रूप में कार्य करने में असमर्थ हैं तथा उनमें इंटर डिसीप्लीनरी नॉलेज, पर्याप्त व्यावहारिक उन्मुखीकरण तथा मौखिक तथा लिखित कौशल का अभाव है। डॉ. पाठक कहते हैं कि भारतीय समाज में फार्मासिस्ट को उतना सम्मान नहीं मिल रहा, जितना कि उसे मिलना चाहिए। इसका मुख्य कारण फार्मेसी शिक्षा में सौहार्द्रता का अभाव है। यही कमी फार्मासिस्टों के पेशेवर मूल्यों का व्यावहारिक रूप से अवमूल्यन कर रही है।

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