संस्कृति विश्वविद्यालय में भव्य समारोह के दौरान ‘स्पोर्ट्स फिएस्टा 2025’ का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि देश की अतंर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त महिला पहलवान बबिता फोगाट ने मशाल जलाकर और ट्राफियों के अनावरण के साथ खेलों की शुरुआत की। उन्होंने संस्कृति विवि के खिलाड़ियों को कहा कि हमने कड़ी मेहनत कर कहावतों को बदला है अब सब कहने लगे हैं, खेलोगे, कूदोगे तो बनोगे लाजवाब, पढ़ोगे, लिखोगे तो बनोगे नवाब।
दंगल गर्ल के नाम से मशहूर बबिता फोगाट खिलोड़ियों के बीच पाकर उत्साहित होकर बोलीं, मैं चाहती हूँ बच्चे आगे बढें, उन्होंने कहा कि मैं जब विश्वविद्यालय के चांसलर डा.सचिन गुप्ता से मिली और बात की तो लगा कि उनके विचार मेरे पिता के विचारों से मेल खाते हैं। सिर्फ पढ़ाई पर ही नही विश्वविद्यालय में खेलों में बच्चों को आगे बढ़ाने के सभी उपाय किये जा रहे हैं। डा. सचिन गुप्ता खेलों के लिए भी विद्यार्थियों को मोटीवेट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदीजी ने एक बात कही थी कि हार को गले नहीं लगाना है और जीत को सिर पर नही बैठाना है, यही खिलाड़ी के आगे बढ़ने का मूल मंत्र है। खिलाड़ी निरन्तर मेहनत करता रहता है। खिलाड़ी न धूप देखता है न छाँव, न बारिश देखता है, हर समय उसे एक ही लगन लगी रहती है कि मेहनत करनी हे।गोल्ड मेडल की “जीत बड़ी बात नहीं है उस जीत को बनाए रखना बड़ी बात है।
समारोह के दौरान विवि के कुलाधिपति डा.सचिन गुप्ता ने कहा कि आज जब विश्वविख्यात महिला पहलवान बबिताजी को युवतियां देखती हैं तो उन जैसा नाम कमाने के बारे में सोचती हैं। आप देशभर की युवतियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं। आपने साबित किया है कि सब कुछ पाना सम्भव है। खेलने से जीवन को जीने की प्रेरणा मिलती है। जब विद्यार्थी पढ़ने और खेलने में व्यस्त रहेंगे तो अन्य बुराइयों से दूर रहेंगे। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब मैंने शतरंज खेलना शुरू किया तो मुझे महसूस हुआ कि मेरे मस्तिष्क सभी हिस्से जाग गए। खेलों से हमारा दिमाग मजबूत बनता है तभी तो खेलो इंडिया के माध्यम से कहते हैं “खेलेगा इंडिया तो बढ़ेगा इन्डिया।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डा0 रजनीश त्यागी ने कहा कि देश की बच्चियों की रोल मॉडल हैं बबिता फोगाट। उन्होंने कहा कि खेलों का महत्व शरीर के लिए ही नहीं है, मन के लिए भी है। खेलने से मन और शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। कुलपति प्रो० एमबी चेट्टी ने स्वागत भाषण में खेलों को खेल की भावना से ही खेलना चाहिए। लक्ष्य पाने के लिए हमें निरन्तर मेहनत करते रहना चाहिए। समारोह के प्रारंभ में विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ता, सीईओ डा मीनाक्षी शर्मा ने मुख्य अतिथि बबिता फोगाट का शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर भावभीना स्वागत और सम्मान किया। अंत में स्टूडेंट वेलफेयर विभाग के डीन डा. डीएस तोमर ने मुख्य अतिथि बबिता फोगाट और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह का संचालन संस्कृति प्लेसमेंट सेल की ज्योति यादव ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में संस्कृति विवि के खेल अधिकारी मो.फहीम और डा. दुर्गेश वाधवा का विशेष योगदान रहा।
संस्कृति विवि में शुरु हो सकती है रेसलिंग अकादमी
संस्कृति एफएम 91.2 के स्टूडियो में हुई बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त महिला पहलवान बबिता फोगाट ने कहा ब्रज में तो कुश्ती की परंपरा युगों से चली आ रही है। यहां बहुत बड़े-बड़े पहलवान हुए हैं। वैसे संस्कृति विवि के कुलाधिपति डा. सचिन गुप्ताजी से बात हुई है, विवि में साथ मिलकर रेसलिंग अकादमी बनाने की उम्मीद है कि जल्द ही यह सपना पूरा होगा।
बबिता ने बताया कि उनको सबसे ज्यादा डर पिताजी की ट्रेनिंग से लगता है। लेकिन उन्हीं की ट्रेनिंग की वजह से आज हम यहां हैं। जब 2018 में कामन वेल्थ में मैंने माता-पिता की मौजूदगी में जीता था तो मुझे बहुत खुशी हुई थी लेकिन पिताजी महावीर फोगाट को गोल्ड से कम कुछ भी मंजूर नहीं था। उनसे जब पूछा गया कि आपकी कहानी बालीबुड तक पहुँचेगी क्या कभी सोचा था उत्तर में बविता ने कहा कि मैंने कभी नही सोचा था, मगर शायद मेरे पिता ने जरुर सोचा होगा।
मंच पर आरजी अर्जुन के एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर आपको कुछ बनना है तो वह आपके जीवन में भी दिखना चाहिए, हमने रेसलिंग को जिया है। सब भूल कर सिर्फ लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ते जाना चाहिए।
