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Saturday, July 13, 2024

जिलाधिकारी पुलकित खरे के उत्कृष्ट प्रयासों से जनपद के 1546 विद्यालयों का कायाकल्प हुआ

जिलाधिकारी पुलकित खरे के उत्कृष्ट प्रयासों से जनपद के 1546 विद्यालयों का कायाकल्प हुआ

जिलाधिकारी पुलकित खरे के उत्कृष्ट प्रयासों से जनपद के 1546 विद्यालयों का कायाकल्प हुआ। विद्यालयों की रैकिंग 19 पैरामीटरों में की जाती है, जिसमें जनपद मथुरा ने प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया। गतवर्ष जनपद मथुरा की रैकिंग 56वीं थी, जिसका सुधार होते हुए आज जनपद मथुरा 10वें स्थान पर आ गया है।
जिलाधिकारी द्वारा निरंतर अधिकारियों के साथ बैठकें की गई तथा निर्देशित किया गया कि सभी स्कूलों को उत्तम बनायें। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं पर विशेष जोर देते हुए बीएसए, एबीएसए प्रधानाचार्य, एडीओ पंचायत तथा ग्राम प्रधान आदि को निर्देशित किया था ।
जिलाधिकारी के निर्देशन में स्कूल चलो अभियान को गति प्राप्त हुई और विद्यालयों में अधिकाधिक पंजीकरण करवाएं गए। उनका लक्ष्य था कि एक भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रहना चाहिए। 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अध्यापक घर घर जाकर प्रोत्साहित करेंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।
शासन की मंशानुसार जिलाधिकारी द्वारा जनपद के 115 जिला स्तरीय अधिकारियों को जनपद के 115 स्कूल गोद दिये गये थे, जिनके निर्देशन में स्कूलों का कायाकल्प किया गया। गोद लिए गए स्कूलों के सम्बंध में अधिकारियों को स्कूलों का कायाकल्प, स्कूल परिसर एवं भवनों का जीर्णोद्धार, शिक्षकों का व्यावहारिक परिवर्तन, स्कूल चलो अभियान के लिए प्रोत्साहन, निपुण भारत की परिकल्पना आदि के निर्देश दिए गए थे। जिलाधिकारी द्वारा समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया था की अपने गोद लिए विद्यालयों में जाकर शिक्षा गुणवत्ता को परखे, बच्चों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दे तथा स्कूल में मीड डे मील को स्वयं खा कर चेक करें। विद्यालयों के सामान्य शौचालय, दिव्यांग शौचालय, पेयजल व्यवस्था, वाउण्ड्रीबाल, टाइल्स, हैंडवाशिंग यूनिट, स्कूल का मैदान आदि का बारीकी से निरीक्षण करें।
स्कूल में बच्चो को लाईब्रेरी का प्रयोग करने तथा पुस्तकें पढ़ने हेतु प्रेरित करें। स्कूल में यदि कोई बच्चा काफी दिनों से नहीं आ रहा है, तो उनके अभिभावकों के साथ वार्ता करें और बच्चें को प्रतिदिन स्कूल भेजने हेतु प्रोत्साहित करें। उक्त अधिकारियों द्वारा निरंतर स्कूलों का निरीक्षण किया गया, कमियों को दूर किया गया, मूलभूत सुविधाओं तथा सभी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की गई।
जिलाधिकारी द्वारा कायाकल्प के सभी 19 पैरामीटर को जल्द से जल्द पूर्ण करने तथा निपुण भारत के लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करने के संबंध में नियमित रूप से शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों एवं शिक्षकों से पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने तथा स्कूलों को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य करने हेतु निर्देशित किया।
स्कूलों के सौंदर्यीकरण एवं 19 पैरामीटर के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु मनरेगा, पंचायत निधि, ग्राम निधि, कंपोजिट ग्रांट आदि फंडों का प्रयोग किया गया। जिलाधिकारी द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम प्रधानों एवं सचिवों को सम्मानित भी किया गया। जिलाधिकारी विद्यालयों के जीर्णोद्वार के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। जिलाधिकारी ने क्रिटिकल गैप्स योजनान्तर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में विज्ञान लैब एवं उपकरणों के लिए लगभग 60 लाख रूपये की धनराशि भी दी थी। उन्होंने स्वयंसेवी, सामाजिक संगठनों एवं व्यापारियों के सहयोग से शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में फर्नीचर, आरओ आदि की व्यवस्था करायी है ।
जिलाधिकारी ने विभिन्न बैठकों में शिक्षकों से कहा कि शिक्षक का दायित्व है, जो योग्य नहीं है, उसे योग्य बनाएं। अगर आप कोई कमजोर बच्चे को योग्यता की श्रेणी में ला देते हैं तो यह आपकी उपलब्धी होगी। अगर आपका बेहतरीन संवाद, रचनात्मक व सकारात्मक सहयोग उन बच्चों को प्राप्त होगा तो वह आजीवन आपका सम्मान करेंगे।
जिलाधिकारी पुलकित खरे की अध्यक्षता में परिषदीय विद्यालयों को सामाजिक अथवा व्यक्तिगत सहयोग के माध्यम से कायाकल्प किये जाने हेतु कायाकल्प विद्यांजलि पोर्टल का भी प्रयोग किया गया। यह पहल स्कूलों को भारतीय डायस्पोरा के विभिन्न स्वयंसेवकों जैसे युवा पेशेवरों, सेवानिवृत्त शिक्षकों, सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों, सेवानिवृत्त पेशेवरों, गैर सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, कॉर्पोरेट संस्थानों और कई अन्य लोगों से जोड़ती है, जिसमे अपनी पसंद के स्कूल के लिए संपत्ति, सामग्री, उपकरण में योगदान कर सकते हैं। अपनी पसंद के स्कूल के लिए सेवा व गतिविधि में योगदान दें सकते हैं।
उक्त सभी प्रयासों का परिणाम आज हम सबके सामने है। जनपद मथुरा ने प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया। भविष्य में विभागों द्वारा समन्वय स्थापित करते हुए जनपद मथुरा को टॉप 10 से टॉप 03 जिलों में लाने का अथक प्रयास किया जायेगा। शासन द्वारा 19 पैरामीटर पर जनपद के 1546 विद्यालयों का मूल्यांकन किया गया था, जिसमें जनपद मथुरा का सैचुरेशन प्रतिशत 94.47 प्रतिशत रहा और मथुरा ने दसवां स्थान प्राप्त किया। मूल्यांकन हेतु सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था, सबमर्सिबल पम्प एवं वाटर टैंक के साथ रनिंग वाटर कनेक्शन, बालकों के लिए कियाशील एवं प्रयोग योग्य शौचालय, बलिकाओं के लिए क्रियाशील एवं प्रयोग योग्य शौचालय, बालकों के लिए क्रियाशील एवं प्रयोग योग्य मूत्रालय, बालिकाओं के लिए कियाशील एवं प्रयोग योग्य मूत्रालय, शौचालय एवं मूत्रालयों में सुव्यवस्थित रूप में समुचित टायल्स, सभी शौचालय एवं मूत्रालयों में निरंतर नल जल आपूर्ति, दिव्यांग मैत्रिक शौचालय निर्मित है, मल्टीपल हैण्डवाशिंग यूनिट का निर्माण, कक्षा-कक्ष की फर्श का मार्बल / कोटा स्टोन द्वारा टाइलीकरण, कक्षा-कक्ष में ब्लैकबोर्ड व ग्रीन बोर्ड की उपलब्धता, सभी कक्षाओं के बच्चों हेतु पठन-पाठन के लिए डेस्क बैंच, रसोईघर पक्के फर्श, छत, नल-जल आपर्ति एवं रंगाई-पुताई के साथ निर्मित है, विद्यालय रंगाई-पुताई से सुसज्जित है, दिव्यांग सुलभ रैम्प एवं रेलिंग, मुख्य द्वार के साथ सुरक्षित चारदिवारी, विद्युत आपूर्ति और सुरक्षित वायरिंग के साथ लाइट व पखें की उपलब्धता तथा विद्युत संयोजन एवं विद्युत आपूर्ति मानकों को पूर्ण कराने के उपरान्त मथुरा जनपद ने प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया ।

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