वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन में शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन विजयदशमी पर श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। नौ दिनों तक चले धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के बाद बुधवार को देवी मां की प्रतिमाओं की शोभायात्रा निकाली गई और विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया।
वृंदावन में 30 से अधिक स्थानों पर देवी मां की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। इन पंडालों में पिछले नौ दिनों से उत्सव, महोत्सव और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और सरस्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई थीं।
विजयदशमी पर बुधवार को पंडालों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न होने के बाद दोपहर से प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों और देवी मां के जयकारों के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। इसके बाद प्रतिमाओं को यमुना के निकट विसर्जित किया गया। घरों में स्थापित सांझी प्रतिमाओं का भी श्रद्धालुओं ने देवी गीत गाते हुए विसर्जन किया। विसर्जन यात्राओं के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
कन्या पूजन के बाद खोले गए नवरात्र के व्रत
नवरात्र के समापन पर व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। बुधवार सुबह कन्याओं को हलवा-चना का भोग लगाकर व्रत खोले गए। श्रद्धालुओं ने कन्याओं को उपहार और दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इस बार कन्या पूजन और भोग लगाने की प्रक्रिया तीन दिनों तक चली।
इस तरह वृंदावन में मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और धार्मिक उत्साह के बीच शारदीय नवरात्र एवं दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन हुआ।