मथुरा का राजकीय संग्रहालय ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कुषाण काल, पाषाण काल समेत विभिन्न युगों की दुर्लभ और ऐतिहासिक कलाकृतियां सुरक्षित हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने के लिए देश-विदेश से वैज्ञानिक, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं यहां पहुंचते हैं।
लेकिन इन बेशकीमती ऐतिहासिक धरोहरों की देखभाल और संग्रहालय की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी फिलहाल महज 15 कर्मचारियों के कंधों पर है।
दरअसल, डैंपियर नगर स्थित राजकीय संग्रहालय में एक समय करीब 65 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन समय के साथ कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में पद रिक्त हो गए। लंबे समय से इन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण कर्मचारियों की संख्या लगातार कम होती चली गई।
मथुरा में दो प्रमुख संग्रहालय हैं। पहला डैंपियर नगर स्थित राजकीय संग्रहालय और दूसरा सदर तहसील के समीप स्थित जैन संग्रहालय। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों संग्रहालयों की जिम्मेदारी फिलहाल कुल 15 कर्मचारियों के भरोसे है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा, संरक्षण और रखरखाव के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों, शोधकर्ताओं और छात्र-छात्राओं की व्यवस्थाओं को महज 15 कर्मचारी किस तरह संभाल रहे हैं।
संग्रहालय अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी को लेकर शासन को लगातार अवगत कराया गया है। रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां किए जाने की मांग भी शासन को भेजी गई है, लेकिन अभी तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है।
मथुरा का राजकीय संग्रहालय ब्रज की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी के चलते संग्रहालय की व्यवस्थाओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना होगा कि शासन की ओर से इन रिक्त पदों को कब तक भरा जाता है और मथुरा की ऐतिहासिक धरोहरों की देखभाल एवं संरक्षण के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती कब होती है।