मथुरा: संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर में “पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बागवानी विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए फसल विविधीकरण पर जोर दिया।
कपिल मीणा ने कहा कि किसानों को पारंपरिक गेहूं–धान की खेती के साथ-साथ स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुरूप फल, सब्जी, फूल एवं अन्य उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने आधुनिक सिंचाई, संरक्षित खेती, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और बेहतर बाजार संपर्क को बागवानी विकास की कुंजी बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि, बागवानी, अनुसंधान, उद्यमिता और सरकारी सेवाओं में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही अपने बीएससी कृषि से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तक के सफर को साझा करते हुए अनुशासन, मेहनत और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया।
कार्यक्रम में संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम. बी. चेट्टी ने कहा कि बागवानी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने के साथ युवा पेशेवरों के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर सकता है।
विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के उप प्रबंध निदेशक डॉ. विजय कुमार दोहरे ने किसानों और उद्यमियों के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, कोल्ड-चेन, पैक हाउस, ग्रेडिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन जैसी सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से बागवानी को नवाचार और व्यवसायिक विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यशाला के समापन पर स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के डीन डॉ. कंचन कुमार सिंह ने मुख्य अतिथियों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता के शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने में योगदान की भी सराहना की गई।