मथुरा: विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर संस्कृति विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग ने स्वास्थ्य, गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में फिजियोथेरेपी की भूमिका को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को फिजियोथेरेपी के महत्व से अवगत कराया।
कार्यक्रम में छात्रों ने रील मेकिंग, रंगोली मेकिंग, स्लोगन राइटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं के जरिए उन्होंने बीमारी की रोकथाम, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन), आत्मनिर्भरता और समग्र स्वास्थ्य में फिजियोथेरेपी के योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
फिजियोथेरेपी विभाग के शिक्षकों ने बताया कि फिजियोथेरेपी केवल चोट या सर्जरी के बाद पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को ताकत, संतुलन, गतिशीलता और आत्मविश्वास लौटाने के साथ स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विद्यार्थियों ने चार्ट, रंगोली और स्लोगन के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार फिजियोथेरेपी चोट, बीमारी और ऑपरेशन के बाद मरीजों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बनने में मदद करती है। कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों ने छात्रों की रचनात्मकता, ज्ञान और सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए उन्हें समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया।