आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर के साथ कथित मारपीट और उन्हें घसीटकर आरपीएफ थाने ले जाने का मामला अब राज्यसभा तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने सदन में मामला उठाते हुए अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लिखित जवाब में बताया कि जुलाई 2026 में आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों द्वारा रेलवे कर्मचारी के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आई थी। मामले में चार RPF कर्मियों को तत्काल निलंबित किया गया और जांच के लिए इंटर-डिपार्टमेंटल जॉइंट इंक्वायरी कमेटी गठित की गई है।
घटना 12 जुलाई को आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर हुई थी। हीराकुंड एक्सप्रेस से जुड़ी एक महिला यात्री के मामले को लेकर डिप्टी स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर और आरपीएफ कर्मियों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद आरपीएफ कर्मियों ने नरेंद्र सिंह चाहर के साथ मारपीट की और उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ थाने ले गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
मामले में आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, बाल किशन और कांस्टेबल बदन सिंह व जितेंद्र कुमार के खिलाफ जीआरपी में मुकदमा भी दर्ज किया गया था। जांच के दौरान स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी खंगाले गए।
राज्यसभा में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था RPF से लेकर CISF को देने से जुड़ा सवाल भी पूछा गया। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि रेलवे सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF को सौंपने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।