मथुरा। एंटी करप्शन टीम के जरिए रिश्वत लेने के आरोप में एक सिपाही को गिरफ्तार कराने वाले युवक ने अब अपनी जान को खतरा बताते हुए एसएसपी से सुरक्षा और कार्रवाई की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि जेल जा चुके सिपाही से जुड़े लोग और क्षेत्र के कुछ नामजद व्यक्ति उस पर अदालत में चल रहे मामले में राजीनामा करने का दबाव बना रहे हैं। समझौता नहीं करने पर जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकियां दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
मामला थाना गोविंदनगर क्षेत्र की महाविद्या कॉलोनी से जुड़ा है। पीड़ित राम उर्फ संजू ई-रिक्शा और अन्य वाहन किराये पर चलवाने का काम करते हैं। उन्होंने एसएसपी को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच कराने के साथ अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
पीड़ित के अनुसार, विवाद की शुरुआत जुलाई 2025 में हुई थी। आरोप है कि उस समय गोविंदनगर थाने में तैनात सिपाही शुभम चौहान ने शहर में ई-रिक्शा चलाने के एवज में उससे रिश्वत की मांग की थी। संजू का आरोप है कि रुपये नहीं देने पर उसे शराब से जुड़े एक कथित झूठे मुकदमे में फंसाकर उससे रकम वसूली गई। इसके बाद उसने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी। शिकायत पर हुई कार्रवाई में सिपाही शुभम को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
अब संजू का आरोप है कि सिपाही से जुड़े लोगों के कहने पर कुछ नामजद व्यक्ति उस पर केस में समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। पीड़ित ने बलवीर और सौरभ प्रधान समेत कुछ लोगों पर धमकी देने के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि राजीनामा नहीं करने पर जान से मारने और झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में 18 मई की रात हुई फायरिंग की घटना का भी जिक्र किया है। उसका दावा है कि महाविद्या कॉलोनी के 80 फुटा रोड पर उसकी स्कॉर्पियो को घेरकर फायरिंग की गई थी, जिसमें वह और उसका साथी बाल-बाल बच गए थे। पीड़ित के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने नामजद मुकदमा दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।
संजू का कहना है कि पूर्व की घटनाओं और कथित धमकियों के चलते उसे आशंका है कि उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है। उसने एसएसपी से मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने और धमकी देने के आरोपों की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
फिलहाल ये आरोप पीड़ित की शिकायत पर आधारित हैं। नामजद पक्ष और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने तथा जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।