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Monday, 27 Jul 2026
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एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ शुरू हुआ डिजिटल अभियान, X और इंस्टाग्राम पर तेजी से बढ़ रहे फॉलोअर्स

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक आंदोलन के दौरान चर्चा में आई CJP (Cockroach Janta Party) के बाद अब सोशल मीडिया पर 'E20 जनता पार्टी' नाम से एक नया डिजिटल अभियान तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। यह अभियान केंद्र सरकार की E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति का विरोध कर रहा है और उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल (E0) खरीदने का विकल्प देने की मांग उठा रहा है। साथ ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग की जा रही है।

अभियान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और इंस्टाग्राम पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके समर्थक दावा कर रहे हैं कि वाहन मालिकों को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वे अपनी जरूरत और वाहन की अनुकूलता के अनुसार ईंधन चुन सकें। अभियान से जुड़े अकाउंट्स पर कम समय में हजारों-लाखों फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं और मीम्स, पोस्ट तथा छोटे वीडियो के जरिए इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाया जा रहा है।

'E20 जनता पार्टी' का कहना है कि वह कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों और पारदर्शिता की मांग करने वाला स्वतंत्र नागरिक अभियान है। इसकी प्रमुख मांगों में पेट्रोल पंपों पर E0 और E20 दोनों विकल्प उपलब्ध कराना, ईंधन की स्पष्ट लेबलिंग, एथेनॉल मिश्रण के प्रभाव से जुड़े सरकारी आंकड़े सार्वजनिक करना तथा माइलेज, इंजन प्रदर्शन और रखरखाव लागत पर स्वतंत्र अध्ययन कराना शामिल है।

इस अभियान को कुछ परिवहन संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। दिल्ली के टैक्सी और टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट संगठनों ने 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने की घोषणा की है। उनका आरोप है कि E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों की माइलेज और इंजन प्रदर्शन प्रभावित होता है तथा रखरखाव का खर्च बढ़ सकता है।

हालांकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि E20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि E20 ईंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण में कमी लाना है। सरकार ने यह भी कहा है कि उसे E20 के कारण वाहनों में व्यापक स्तर पर समस्या आने की पुष्टि करने वाली शिकायतें नहीं मिली हैं।

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