बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। चुनाव प्रचार थमने से पहले राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। यूरोप दौरे से लौटते ही नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव सीधे चुनावी मैदान में उतर गए हैं। उनका मकसद पार्टी उम्मीदवार रेखा गुप्ता के पक्ष में माहौल बनाना और चुनावी मुकाबले को नई दिशा देना है।
पटना की बांकीपुर सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। 1996 से यह सीट लगातार बीजेपी के कब्जे में रही है। मौजूदा उपचुनाव राज्यसभा जाने के बाद पूर्व विधायक नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई है। बीजेपी ने यहां नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है, जबकि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि तीन बड़े राजनीतिक चेहरों की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब तक चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और प्रशांत किशोर के बीच सिमटता दिखाई दे रहा था। ऐसे में तेजस्वी यादव की अचानक और आक्रामक एंट्री का उद्देश्य आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को मजबूती देना और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाना है। इसके लिए तेजस्वी लगातार रोड शो, जनसंपर्क अभियान और स्थानीय लोगों से संवाद कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव के चुनावी कार्यक्रम में बांकीपुर के कई अहम इलाकों में रोड शो शामिल है। वे लोगों के बीच जाकर महंगाई, बेरोजगारी, विकास और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। आरजेडी का दावा है कि जनता बदलाव चाहती है और इसी भरोसे के साथ पार्टी आखिरी समय में पूरी ताकत झोंक रही है।
हालांकि आरजेडी के सामने चुनौती आसान नहीं है। बांकीपुर विधानसभा सीट का इतिहास बीजेपी के पक्ष में रहा है और पार्टी का शहरी वोट बैंक यहां काफी मजबूत माना जाता है। दूसरी ओर प्रशांत किशोर भी इस चुनाव को अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता की पहली बड़ी परीक्षा मानकर पूरी ताकत से प्रचार कर रहे हैं। जन सुराज लगातार शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार और सुशासन जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
इस बीच चुनावी समीकरणों में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद प्रशांत किशोर को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस फैसले ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है और राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस शुरू हो गई है।
बीजेपी भी इस सीट को हर हाल में बचाए रखना चाहती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हैं और इसे अपनी प्रतिष्ठा का चुनाव मान रहे हैं। वहीं प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। अगर वे इस सीट पर मजबूत प्रदर्शन करते हैं तो बिहार की राजनीति में उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।
अब सभी की नजरें चुनाव प्रचार के अंतिम चरण और मतदान पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तेजस्वी यादव के दो दिन के तूफानी प्रचार से आरजेडी को कोई बड़ा फायदा मिलेगा, या फिर बीजेपी अपना अभेद्य किला बचाने में कामयाब रहेगी। वहीं यह चुनाव यह भी तय करेगा कि क्या प्रशांत किशोर अपनी पहली चुनावी परीक्षा में नई राजनीतिक इबारत लिख पाएंगे।