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Wednesday, 08 Jul 2026
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"साहब, मैं जिंदा हूं..." बीडीओ की रिपोर्ट में बुजुर्ग को कर दिया मृत, वृद्धावस्था पेंशन बंद होने से खुली बड़ी लापरवाही

मथुरा। शासन की जनसुनवाई व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान करने वाला मामला बलदेव ब्लॉक से सामने आया है। वृद्धावस्था पेंशन बंद होने की शिकायत करने वाले एक बुजुर्ग को आईजीआरएस जांच रिपोर्ट में ही मृत घोषित कर दिया गया। अब पीड़ित अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है और न्याय की गुहार लगा रहा है।

पीड़ित बृजमोहन पुत्र स्वर्गीय रामस्वरूप, निवासी ग्राम कचनऊ, विकास खंड बलदेव ने वृद्धावस्था पेंशन बंद होने के बाद मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर शिकायत दर्ज कराई थी। शासन स्तर से शिकायत का निस्तारण करने के लिए मामला समाज कल्याण विभाग, मथुरा को भेजा गया। समाज कल्याण विभाग ने जांच के लिए विकास खंड बलदेव से आख्या मांगी।

आरोप है कि खंड विकास कार्यालय से बिना मौके पर जांच किए रिपोर्ट भेज दी गई, जिसमें बृजमोहन को मृत दर्शा दिया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण विभाग ने भी अपनी आख्या शासन को भेज दी।

पीड़ित बृजमोहन ने एक वीडियो जारी कर कहा, "साहब, मैं जिंदा हूं, लेकिन बीडीओ बलदेव ने मुझे आईजीआरएस की रिपोर्ट में मृत घोषित कर दिया है। अब मैं अपनी पहचान और पेंशन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।"

वहीं, समाज कल्याण विभाग के जांच अधिकारी धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि खंड विकास अधिकारी बलदेव की ओर से प्राप्त आख्या के आधार पर ही रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी।

जब इस संबंध में खंड विकास अधिकारी बलदेव नेहा रावत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि "जांच करने के बाद ही बता पाऊंगी कि यह रिपोर्ट किसने लगाई है।" हालांकि, पीड़ित और समाज कल्याण विभाग के जांच अधिकारी दोनों का कहना है कि रिपोर्ट विकास खंड कार्यालय से भेजी गई थी। आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज आख्या में भी इसी का उल्लेख होने का दावा किया जा रहा है।

यह मामला अब केवल एक पेंशन शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर जिलाधिकारी मथुरा चंद्र प्रकाश सिंह लगातार बैठकों और फील्ड निरीक्षण के माध्यम से सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित करने का जिम्मेदार कौन है, इस गंभीर लापरवाही की जांच कब होगी, दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी और पीड़ित बृजमोहन को आखिर न्याय कब मिलेगा।

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