मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली ब्रजभूमि के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़े 84 कोस ब्रज क्षेत्र की भौगोलिक सीमाओं और विकास को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। मथुरा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मनिकेश चतुर्वेदी की याचिका में उठाए गए मुद्दे के अनुसार, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के साथ मिलकर पूरे ब्रज क्षेत्र की सीमाओं एवं विकास से जुड़े विषयों की समीक्षा करने को कहा है।
याचिका में ब्रज तीर्थ विकास परिषद के क्षेत्राधिकार और 84 कोस ब्रज यात्रा की पारंपरिक भौगोलिक सीमाओं का मुद्दा उठाया गया था। इसमें बताया गया कि पौराणिक ब्रज क्षेत्र केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार राजस्थान के भरतपुर और हरियाणा के होडल-पलवल क्षेत्रों तक भी माना जाता है।
इस संबंध में अदालत के समक्ष यह विषय रखा गया कि एक राज्य की संस्था दूसरे राज्यों के क्षेत्र में सीधे विकास कार्य नहीं करा सकती। ऐसे में पूरे 84 कोस ब्रज क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी विकास के लिए अंतरराज्यीय समन्वय आवश्यक है।
इस मामले में केंद्र सरकार के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा सरकारों के बीच समन्वय स्थापित कर ब्रज क्षेत्र के एकीकृत विकास की दिशा में समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य ब्रज के धार्मिक स्थलों, तीर्थ मार्गों और सांस्कृतिक विरासत का विकास राज्य की सीमाओं से परे समन्वित तरीके से करना है।
ब्रज क्षेत्र की पारंपरिक सीमाओं को लेकर यह मामला स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि तीनों राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित होता है तो 84 कोस ब्रज परिक्रमा मार्ग और इससे जुड़े धार्मिक स्थलों के विकास को नई दिशा मिल सकती है।