मथुरा में आगामी 15 नवंबर को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक कुवलयापीड़ हाथी वध महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। महोत्सव में शामिल होने के लिए विभिन्न मंदिरों और देवालयों को निमंत्रण दिया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजन समिति के सदस्य राज नारायण गौड़ भूतेश्वर स्थित प्राचीन श्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे और श्री बद्रीनाथ महाराज को महोत्सव में पधारने का निमंत्रण दिया।
भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में प्राचीन धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में कुवलयापीड़ हाथी वध महोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 15 नवंबर को होने वाले इस महोत्सव को लेकर आयोजन समिति के सदस्य मंदिरों और देवालयों में पहुंचकर निमंत्रण दे रहे हैं।
इसी क्रम में समिति के सदस्य राज नारायण गौड़ मथुरा के भूतेश्वर स्थित अति प्राचीन श्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। यहां उन्होंने श्री बद्रीनाथ महाराज को महोत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और आयोजन की जानकारी दी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुवलयापीड़ हाथी का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की मथुरा यात्रा से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण और बलराम धनुष यज्ञ और रंगभूमि की ओर जा रहे थे, तब कंस के आदेश पर महावत ने कुवलयापीड़ हाथी को भगवान श्रीकृष्ण पर आक्रमण करने के लिए उकसाया।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने हाथी के हमलों का सामना किया और अंततः उसका वध कर दिया। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इसके बाद श्रीकृष्ण और बलराम ने हाथी के विशाल दांतों को अपने कंधों पर धारण किया और आगे बढ़े।
कुवलयापीड़ हाथी वध महोत्सव के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की इस प्राचीन लीला का स्मरण किया जाता है। आयोजन समिति द्वारा महोत्सव को भव्य रूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। अब श्रद्धालुओं की निगाहें 15 नवंबर को होने वाले इस धार्मिक आयोजन पर टिकी हैं।