मथुरा। धर्मनगरी मथुरा में यमुना के प्रदूषित जल को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कार्तिक मास में जहां श्रद्धालु यमुना स्नान को धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं, वहीं नदी के प्रदूषित जल को लेकर चिंता जताई जा रही है। पंडित अमित भारद्वाज ने यमुना की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
पंडित अमित भारद्वाज ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति की बात करने वाली सरकार, प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को यमुना की दुर्दशा पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास में पूरे महीने सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने की परंपरा का महिलाएं श्रद्धापूर्वक पालन करती हैं। लेकिन यमुना के प्रदूषित जल के कारण श्रद्धालुओं के सामने गंभीर चिंता की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि यमुना के जल की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही चिंताजनक रिपोर्टों के बीच श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्रदूषण के चलते कुछ महिलाएं घरों में ही स्नान की परंपरा निभाने को मजबूर हैं। ऐसे में यमुना की स्वच्छता सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पंडित भारद्वाज ने आगामी यम द्वितीया पर्व का उल्लेख करते हुए कहा कि मथुरा में इस पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाई-बहन यमुना स्नान के लिए पहुंचते हैं। यदि यमुना के जल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो श्रद्धालुओं को प्रदूषित जल में स्नान करने की मजबूरी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने ब्रज रस उत्सव के आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर ब्रज की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ब्रज की अधिष्ठात्री देवी मां यमुना के जल की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
पंडित अमित भारद्वाज ने शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सनातन संस्कृति की बात करने वाले नेताओं से यमुना की स्वच्छता के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यमुना की स्वच्छता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और ब्रज की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।