बुराई पर अच्छाई की जीत... अधर्म पर धर्म की विजय... और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक विजयदशमी का पर्व मथुरा में धूमधाम से मनाया गया। कृष्णा नगर के रामलीला मैदान में जैसे ही रावण और कुंभकरण के पुतले धू-धू कर जले, पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। दस दिनों तक चली रामलीला के समापन पर रावण दहन देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक पहुंचे। आखिर कैसा रहा विजयदशमी का यह भव्य आयोजन? देखिए हमारी खास रिपोर्ट।
मथुरा के कृष्णा नगर रामलीला मैदान में विजयदशमी के अवसर पर आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां पिछले दस दिनों से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा था। मंगलवार को विजयदशमी के दिन रामलीला के अंतिम प्रसंग में भगवान श्रीराम और रावण की सेना के बीच भीषण युद्ध का मंचन हुआ।
राम दल और रावण सेना के बीच हुए युद्ध के बाद आखिरकार अधर्म पर धर्म की विजय हुई। भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया, जिसके बाद रावण और कुंभकरण के विशाल पुतलों का दहन किया गया। पुतलों में आग लगते ही मैदान में मौजूद दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। चारों ओर जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे और लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को अपने कैमरों में कैद किया।
रावण दहन देखने के लिए मथुरा के कृष्णा नगर क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हजारों दर्शकों की भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, सनातन धर्म रामलीला कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आयोजन की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
आयोजन की खास बात यह रही कि कृष्णा नगर की यह रामलीला पिछले करीब 60 वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है। सनातन धर्म रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र के लोग आपसी सहयोग और उत्साह के साथ इस आयोजन में भाग लेते हैं। यही वजह है कि हर वर्ष विजयदशमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचते हैं।