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Tuesday, 20 Oct 2026
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वृंदावन में विश्व कल्याणार्थ चल रहे शतचंडी महायज्ञ का पूर्णाहुति के साथ समापन

धर्मनगरी वृंदावन में शारदीय नवरात्र के अंतर्गत विश्व कल्याण की कामना से आयोजित शतचंडी महायज्ञ का विधि-विधान के साथ समापन हो गया। गोपीनाथ बाजार स्थित श्रीकृष्ण कालीपीठ में महादशमी के अवसर पर मां काली की विशेष पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। समापन अवसर पर कन्या पूजन, बटुक पूजन, सुवासिनी पूजन और भंडारा प्रसाद का आयोजन भी किया गया।

श्रीकृष्ण कालीपीठ में पीठाधीश्वर डॉ. केशवाचार्य महाराज के सान्निध्य में विश्व कल्याणार्थ शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा था। मंगलवार को महादशमी के पावन अवसर पर मां काली की पूजा-अर्चना और विशेष आरती के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने यज्ञ में पूर्णाहुति देकर विश्व में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

पीठाधीश्वर डॉ. केशवाचार्य महाराज ने श्रीकृष्ण कालीपीठ की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां मां का स्वयंभू प्रकट चतुर्भुजी कसौटी शिला का अचल विग्रह और चल विग्रह विराजमान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीराधारानी और ब्रज की गोपियों पर कृपा करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने काली स्वरूप धारण किया था। इसी मान्यता के चलते श्रीकृष्ण कालीपीठ का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

डॉ. केशवाचार्य महाराज ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के केश गिरे थे, जिसके कारण इसे पहले केश घाट कहा जाता था। बाद में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा केशी दैत्य का वध किए जाने के बाद यह स्थान केशीघाट के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि मां कृष्ण काली का चल विग्रह वर्तमान में गोपीनाथ बाजार स्थित श्रीकृष्ण कालीपीठ में विराजमान है। दुर्गा सप्तशती में भगवती के 108 नामों के अंतर्गत मां कृष्ण काली का उल्लेख भी विशेष रूप से किया जाता है।

शतचंडी महायज्ञ के समापन पर धार्मिक परंपराओं के अनुसार कन्या पूजन, बटुक पूजन और सुवासिनी पूजन किया गया। इसके बाद यज्ञ की पूर्णाहुति और भंडारा प्रसाद का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने मां काली के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और विश्व कल्याण की प्रार्थना की।

वृंदावन के श्रीकृष्ण कालीपीठ में संपन्न हुआ शतचंडी महायज्ञ श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक बना। मां काली की आराधना और पूर्णाहुति के साथ श्रद्धालुओं ने विश्व में सुख, शांति और कल्याण की कामना की।

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