वृंदावन में विजयादशमी के अवसर पर आस्था, अपनत्व और बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीधाम वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित मैत्री घर विधवा आश्रम में पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। इस दौरान 109 वर्षीय रेनू दासी और 98 वर्षीय शांति कपूर सहित सैकड़ों वृद्ध माताओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। भावुक कर देने वाले इस आयोजन ने माताओं को उनकी पुरानी यादों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ दिया।
विजयादशमी पर मैत्री घर विधवा आश्रम का वातावरण भक्तिमय और भावनात्मक नजर आया। बंगाल की प्रसिद्ध दुर्गा पूजा परंपरा सिंदूर खेला के दौरान वृद्ध माताओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। 109 वर्षीय रेनू दासी और 98 वर्षीय शांति कपूर सहित सैकड़ों माताओं की सहभागिता ने इस आयोजन को खास बना दिया।
आयोजन में शामिल माताओं ने मैत्री घर की संचालिका बिन्नी सिंह और संस्थापकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वृंदावन की पावन भूमि पर बंगाल की इस पारंपरिक रस्म को जीवंत होते देखना उनके लिए आध्यात्मिक आनंद और भावनात्मक संतोष का अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से उन्हें अपनी पुरानी यादों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का मौका मिला।
सिंदूर खेला का यह आयोजन केवल एक धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सेवा, सम्मान, अपनत्व और आपसी प्रेम का संदेश भी दिया। वृद्ध माताओं के चेहरों पर खुशी और भावुकता ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
वृंदावन के मैत्री घर आश्रम में आयोजित सिंदूर खेला ने यह संदेश दिया कि उम्र चाहे कितनी भी हो, अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव जीवन में खुशियों के रंग भर सकता है।