ब्रजभूमि मथुरा में मां भगवती के प्राचीन मंदिरों की अपनी अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं हैं। इन्हीं में से एक है मसानी तिराहा स्थित प्राचीन मां पथवारी देवी का मंदिर, जहां से श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्राओं का शुभारंभ करते हैं। मान्यता है कि अन्य देवी मंदिरों में दर्शन करने जाने से पहले मां पथवारी के दरबार में हाजिरी लगाई जाती है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर में नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान हुए और नवमी के दिन विशेष हवन-यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ नवरात्रि के आयोजन संपन्न हुए।
मसानी तिराहा स्थित मां पथवारी देवी के प्राचीन मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान भक्तों की आस्था देखने को मिली। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में विशेष हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। नवमी के पावन अवसर पर विधि-विधान से हवन की पूर्णाहुति हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हुए यज्ञ में आहुतियां दीं।
मंदिर के सेवायत राजेंद्र शर्मा ने बताया कि मां पथवारी देवी का यह दरबार लगभग 2000 वर्ष पुराना माना जाता है। मंदिर की विशेष मान्यता है कि मथुरा और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालु नई सेमरी, नगरकोट, संचोली और कैलादेवी जैसे देवी मंदिरों की यात्रा पर निकलने से पहले मां पथवारी के दरबार में माथा टेकते हैं। इसके बाद ही अपनी धार्मिक यात्रा शुरू करते हैं।
सेवायत राजेंद्र शर्मा के अनुसार, मथुरा के अलावा आगरा, हाथरस और सादाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां पथवारी के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि यह प्राचीन मंदिर लंबे समय से लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में हुए विशेष हवन-यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। नवमी पर पूर्णाहुति के साथ धार्मिक आयोजनों का समापन हुआ। भक्तों ने मां भगवती से परिवार की खुशहाली और पूरे क्षेत्र में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की।
कुल मिलाकर, मसानी तिराहा स्थित मां पथवारी देवी का प्राचीन दरबार आस्था और परंपरा का प्रतीक है। देवी दर्शन की यात्रा से पहले यहां हाजिरी लगाने की मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के विश्वास को दर्शाती है।