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Tuesday, 20 Oct 2026
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मथुरा में 26 साल से हो रही रावण की पूजा, लंकेश भक्त मंडल ने पुतला दहन का किया विरोध

देशभर में विजयदशमी पर रावण का पुतला जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन ब्रज की नगरी मथुरा में एक ऐसी परंपरा भी है, जहां दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। यमुना पुल के निकट स्थित लंकेश्वर महादेव मंदिर में लंकेश भक्त मंडल और सारस्वत समाज के लोगों ने दशानन रावण की विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान मंडल के सदस्यों ने रावण के पुतला दहन का विरोध करते हुए इस परंपरा पर पुनर्विचार करने की अपील की।

मथुरा के लंकेश्वर महादेव मंदिर में रावण की पूजा की परंपरा पिछले 26 वर्षों से चली आ रही है। दशहरे के अवसर पर मंदिर में भगवान शिव की आराधना के साथ दशानन रावण की पूजा की जाती है। इस दौरान महामंत्र जाप और रावण की महाआरती का आयोजन होता है, जिसमें लंकेश भक्त मंडल के सदस्यों और सारस्वत समाज के लोगों की भागीदारी रहती है।

लंकेश भक्त मंडल के सदस्यों का कहना है कि रावण चारों वेदों का ज्ञाता और भगवान शिव का परम भक्त था। उनका मानना है कि रावण के विद्वान व्यक्तित्व और उसकी शिवभक्ति को भी याद किया जाना चाहिए। मंडल के सदस्य माता सीता के प्रति रावण के व्यवहार को लेकर भी अपना पक्ष रखते हुए हर वर्ष किए जाने वाले पुतला दहन का विरोध करते हैं।

मंडल के सदस्य और अधिवक्ता ओमबीर सारस्वत ने कहा कि रावण का पुतला जलाने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि बुराई का अंत करना है, तो सबसे पहले अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध और अन्य अवगुणों को समाप्त करना जरूरी है। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाना ही दशहरे के संदेश को सार्थक बनाने का रास्ता है।

लंकेश भक्त मंडल के सदस्य इसी विचार के साथ लोगों को जागरूक करते हैं कि दशहरे पर केवल प्रतीकात्मक रूप से पुतला जलाने के बजाय अपने भीतर की बुराइयों को खत्म करने का संकल्प भी लेना चाहिए। मंदिर में होने वाली पूजा-अर्चना के जरिए मंडल रावण के विद्वान व्यक्तित्व और भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति को सामने रखने का प्रयास करता है।

बहरहाल, मथुरा में पिछले 26 वर्षों से चली आ रही रावण पूजा की यह परंपरा दशहरे के पारंपरिक आयोजन से अलग है। जहां एक ओर देशभर में रावण दहन किया जाता है, वहीं लंकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा के माध्यम से आत्ममंथन और अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त करने का संदेश दिया जा रहा है।

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