जनपद में शिक्षकों के बीच शैक्षिक शोध एवं नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान , मथुरा में शोध एवं नवाचार से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को व्यवस्थित स्वरूप देने, शोध की गुणवत्ता बढ़ाने तथा उत्कृष्ट शोध कार्यों को शोध पत्रिका/जर्नल में प्रकाशित कराने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में शैक्षिक शोध के विभिन्न पहलुओं पर विषय विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से शोध समस्या के चयन, शोध परिकल्पना, शोध करने की विधि, शोध प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं तथा उनके निदान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि विद्यालय स्तर पर कार्यरत शिक्षक अपने शिक्षण अनुभव के आधार पर अनेक ऐसी समस्याओं को पहचानते हैं, जिन पर गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक शोध किया जा सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि इन समस्याओं को व्यवस्थित रूप से शोध समस्या में परिवर्तित कर वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तरीके से उनका अध्ययन किया जाए।
विषय विशेषज्ञ डॉ रवीश शर्मा ने शिक्षकों को शोध कार्य करते समय समस्या की स्पष्ट पहचान, शोध के उद्देश्य निर्धारित करने, उपयुक्त शोध विधि का चयन, आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण तथा शोध के आधार पर निष्कर्ष निकालने के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शोध केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उससे प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग कक्षा-कक्ष में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों की शैक्षिक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए।
कार्यशाला में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि मथुरा जनपद के जो शिक्षक अपना शोध कार्य प्रकाशित कराना चाहते हैं, वे डायट प्राचार्य डॉ धर्मेंद्र शर्मा जी से संपर्क कर सकते हैं। शिक्षकों द्वारा किए गए अच्छे एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों को शोध पत्र/जर्नल के रूप में प्रकाशित कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जाएगी।
इससे जनपद के शिक्षकों को अपने शोध कार्य को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर मिलेगा तथा अन्य शिक्षक भी उन शोधों से प्राप्त निष्कर्षों और नवाचारों को अपने विद्यालयों में लागू कर सकेंगे
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शिक्षकों के बीच “शोध करें, समस्या पहचानें और समाधान खोजें” की संस्कृति विकसित की जाए। शिक्षकों को अपने विद्यालयों एवं स्थानीय परिस्थितियों से जुड़ी वास्तविक शैक्षिक समस्याओं पर शोध करने के लिए प्रेरित किया गया।
डायट प्राचार्य द्वारा इस शोध एवं नवाचार की संस्कृति को आगे बढ़ाने तथा इसे व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर आवश्यक पहल एवं संवाद किए जाने की बात भी सामने आई।
कार्यशाला का उद्देश्य केवल शिक्षकों को शोध की तकनीकी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें एक चिंतनशील, शोधपरक एवं नवाचारी शिक्षक के रूप में विकसित करना रहा। वरिष्ठ डायट प्रवक्ता श्री जमुना प्रसाद जी ने कहा कि यदि शिक्षक अपनी कक्षा में आने वाली समस्याओं का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन कर उनके समाधान खोजते हैं, तो इससे न केवल उनके स्वयं के शिक्षण में सुधार होगा, बल्कि पूरे विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
डायट प्रवक्ता डॉ. गौरव सक्सेना ने कहा कि विद्यालय में विद्यार्थियों की सीखने की कठिनाइयों, उपस्थिति, भाषा एवं गणितीय दक्षता, शिक्षण विधियों, डिजिटल संसाधनों, अभिभावक सहभागिता, समावेशी शिक्षा और अन्य स्थानीय शैक्षिक चुनौतियों को शोध का विषय बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञ ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध से प्राप्त निष्कर्षों को व्यवहार में लागू करना ही शोध की वास्तविक सफलता है। इससे शिक्षक अपने अनुभव को प्रमाण आधारित ज्ञान में बदल सकते हैं और विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी शिक्षण वातावरण तैयार कर सकते हैं।
कार्यशाला ने मथुरा जनपद में शिक्षकों के बीच शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रकाशन का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल का स्वरूप लिया।
कार्यशाला में डायट प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, विषय विशेषज्ञ डॉ. रवीश शर्मा प्रोफेसर, बी.एस.ए. कॉलेज, मथुरा,वरिष्ठ प्रवक्ता जमुना प्रसाद, डॉ. गौरव सक्सेना, श्री अनिल कुमार वर्मा सहित अन्य संबंधित शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।