अलवर। राजस्थान के अलवर में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के खिलाफ सफाई कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। मामला करीब सात साल से लंबित सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा था।
दरअसल, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई सफाई कर्मचारी लंबे समय से नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार कर रहे थे। इसी मांग को लेकर कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर नगर निगम परिसर में धरना शुरू किया। कर्मचारियों के बीच पहुंचे मंत्री संजय शर्मा भी उनके साथ धरने पर बैठ गए और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
मंत्री ने अलवर कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला और नगर निगम आयुक्त पर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने में अनावश्यक देरी की जा रही है।
मंत्री के धरने की खबर जयपुर तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी। करीब चार घंटे चले धरने के बाद पांच पात्र सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंप दिए गए, जिसके बाद मंत्री ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
संजय शर्मा ने साफ किया कि मामला सिर्फ पांच कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जो भी अभ्यर्थी पात्र हैं, उन्हें नियुक्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 16 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यक्रम के दौरान भी पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में भी चर्चा छेड़ दी है, क्योंकि सत्ता पक्ष के ही एक मंत्री का अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठना असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है