Please wait we are preparing awesome things...

Tuesday, 11 Aug 2026
ई-पेपर संस्करण
www.abhinews.co.in
उत्तर प्रदेश संस्करण
PAGE - 01
फाइटर जेट से मिसाइल तक... चीन के हाथ में अमेरिका की मिलिट्री सप्लाई की ‘चाबी’?

अमेरिका के पास दुनिया के अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल और सैन्य हथियार हैं, लेकिन इन हथियारों की सप्लाई चेन का एक बेहद अहम हिस्सा चीन के पास है। वजह है रेयर अर्थ मिनरल्स, जिनका इस्तेमाल आधुनिक सैन्य तकनीक में बड़े पैमाने पर होता है।

अमेरिका और चीन के बीच रेयर अर्थ को लेकर तनाव लगातार चर्चा में है। चीन रेयर अर्थ की माइनिंग के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण में भी दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ियों में शामिल है। ऐसे में चीन से सप्लाई प्रभावित होने पर अमेरिका की डिफेंस इंडस्ट्री के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।

रेयर अर्थ से बनाए जाने वाले विशेष मैग्नेट का इस्तेमाल F-35 फाइटर जेट, ड्रोन, मिसाइल, पनडुब्बियों और रडार जैसे सैन्य सिस्टम में किया जाता है। यही वजह है कि इन खनिजों की सप्लाई आधुनिक सैन्य उत्पादन के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चीन सप्लाई रोक दे तो अमेरिका के सभी फाइटर जेट उड़ना बंद कर देंगे। असली चिंता लंबे समय तक सप्लाई बाधित होने पर नए हथियारों के उत्पादन और सप्लाई पर पड़ने वाले असर को लेकर है।

रेयर अर्थ 17 अलग-अलग खनिज तत्वों का समूह है। चीन की ताकत केवल इन्हें जमीन से निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें प्रोसेस करने और हाई-परफॉर्मेंस मैग्नेट बनाने में भी उसकी बड़ी हिस्सेदारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की करीब 90 फीसदी रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता चीन के पास है। वहीं 2019 से 2022 के बीच अमेरिका में आयात हुए रेयर अर्थ का करीब 75 फीसदी हिस्सा चीन से आया था। यही निर्भरता अमेरिका के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बनी हुई है।

चीन पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका घरेलू रेयर अर्थ सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दे रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग 2020 से इस दिशा में 439 मिलियन डॉलर से ज्यादा की सहायता दे चुका है।

अमेरिका का लक्ष्य केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि माइन से लेकर प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण तक पूरी सप्लाई चेन को घरेलू स्तर पर विकसित करना है।

यानी मामला सिर्फ रेयर अर्थ का नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य ताकत और सप्लाई चेन की सुरक्षा का भी है। चीन की मजबूत पकड़ अमेरिका के लिए चिंता जरूर है, लेकिन तत्काल तौर पर इसे अमेरिकी सैन्य ताकत के ठप होने के रूप में देखना सही नहीं होगा। असली चुनौती लंबे समय तक सप्लाई बाधित होने पर सामने आ सकती है।

Previous News

हिमाचल में चलती कार पर अचानक गिरा पहाड़, पत्थर-मलबे में दबा वाहन - 2 लोग घायल

Next News

भारत में जल्द दिखेंगे प्लास्टिक वाले नोट! ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ पॉलिमर नोटों का होगा ट्रायल