आगरा। 65 वर्षीय शीला देवी की जिंदगी और मौत से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। 30 जुलाई को डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे, लेकिन करीब 17 घंटे बाद उनके शरीर में हलचल महसूस हुई और परिवार ने उन्हें जीवित पाया।
इसके बाद शीला देवी को आगरा के पार्क हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां वह करीब 9 दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ती रहीं। परिवार को उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी, लेकिन रविवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
शीला देवी के निधन के बाद उनके बेटे ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार ने इलाज के दौरान करीब 5 लाख रुपये का बिल दिए जाने का भी दावा किया है। हालांकि, अस्पताल पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
अब परिवार ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। इस घटना ने एक ओर जहां परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, वहीं अस्पताल में इलाज और मरीज को मृत घोषित किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।