शहर के बीएसए कॉलेज के पास सोमवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आपस में लड़ रहे दो आवारा सांड अचानक खुले नाले में जा गिरे। गहरे नाले में फंसे दोनों सांड बाहर निकलने के लिए काफी देर तक संघर्ष करते रहे। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर जुट गए। करीब दो घंटे तक चले संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जेसीबी, फायर ब्रिगेड, नगर निगम की टीम और गौरक्षकों की मदद से दोनों सांडों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
घटना सोमवार रात करीब 10 बजे की बताई जा रही है। बीएसए कॉलेज के समीप दो आवारा सांड आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान दोनों अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खुले पड़े नाले में गिर गए। नाला गहरा होने के कारण दोनों सांड उसमें फंस गए और अपने आप बाहर नहीं निकल सके।
सांडों के नाले में गिरने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना नगर निगम को दी। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद काफी देर तक नगर निगम की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची। नाले में फंसे सांडों की हालत को देखते हुए लोगों ने वृंदावन के गौरक्षक दल से संपर्क किया।
सूचना मिलते ही गौरक्षक मौके पर पहुंचे और दोनों सांडों को नाले से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बावजूद जब सांडों को बाहर नहीं निकाला जा सका तो बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाने की जरूरत पड़ी।
इसके बाद फायर ब्रिगेड, जेसीबी और नगर निगम की टीम को मौके पर बुलाया गया। टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। नाले में फंसे सांडों को किसी तरह की चोट न पहुंचे, इसे ध्यान में रखते हुए सावधानी के साथ उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया गया।
करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों सांडों को सुरक्षित नाले से बाहर निकाल लिया गया। सांडों के बाहर निकलते ही मौके पर मौजूद लोगों और गौरक्षकों ने राहत की सांस ली। इसके बाद दोनों गोवंशों को सुरक्षित रूप से वृंदावन स्थित गौशाला भेज दिया गया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने खुले नाले को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का आरोप है कि बीएसए कॉलेज के पास स्थित यह नाला लंबे समय से खुला पड़ा है और इसके कारण लगातार हादसे का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जाने के बावजूद व्यस्त क्षेत्र में मौजूद इस खुले नाले को अब तक पूरी तरह कवर नहीं किया गया है। यहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन और पैदल राहगीर गुजरते हैं। ऐसे में खुले नाले के कारण गोवंश के साथ किसी व्यक्ति के भी हादसे का शिकार होने की आशंका बनी रहती है।
गौरक्षकों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि नाले को जल्द से जल्द कवर कराया जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। सोमवार रात हुई घटना में दोनों सांडों की जान तो समय रहते बचा ली गई, लेकिन खुले नाले ने एक बार फिर शहर में सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।