केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण जनआंदोलन की बड़ी जीत बताया है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह फैसला देशभर के युवाओं, छात्रों और शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के धैर्य, संघर्ष और लोकतांत्रिक ताकत का परिणाम है।
सोनम वांगचुक ने कहा, "यह लोकतंत्र की जीत है। यह सीधे सड़कों से निकले प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत है। यह शांति, धैर्य और लगातार संघर्ष की भी जीत है।" उन्होंने CJP, देशभर के Gen Z छात्रों और आंदोलन का समर्थन करने वाले नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि अब केवल जवाबदेही तय करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने का समय आ गया है।
वांगचुक ने अपने संदेश में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक सफलता तब होगी जब शिक्षा व्यवस्था में ठोस और स्थायी सुधार किए जाएंगे।
गौरतलब है कि NEET-UG विवाद और देशभर में चले छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दिया। इस घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया, जबकि आंदोलन से जुड़े नेताओं ने संकेत दिए हैं कि शेष मांगों पर निर्णय होने तक उनका अभियान जारी रहेगा।