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Tuesday, 07 Jul 2026
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बारिश बनी परीक्षा, फेल हुई मथुरा की जल निकासी व्यवस्था

मथुरा में हुई तेज बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी हैं महज कुछ चंद मिनट की बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख मार्ग, बाजार और आवासीय क्षेत्र जलमग्न हो गए सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जिससे पैदल चलना तो दूर, दोपहिया और चारपहिया वाहन निकालना भी लोगों के लिए चुनौती बन गया लोगो का कहना है कि हर वर्ष बरसात से पहले नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ जाती है शहर के अनेक इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं दुकानदारों और राहगीरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा हैं 

हाल ही के दिनों में भूतेश्वर अंडरपास क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया था जिससे निर्माण कार्य के दौरान लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहा और आम जनता के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी असुविधा झेलनी पड़ी अब लगातार हो रही बारिश के बीच लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जिस परियोजना का उद्देश्य जलभराव की समस्या का समाधान था, आखिर उसका असर धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा आपको बता दें कि मथुरा-वृंदावन को धार्मिक और पर्यटन नगरी होने के कारण विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं मिलती हैं

लेकिन बारिश के दौरान हालात देखकर यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इन योजनाओं का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा लोगों का मानना है कि जलभराव जैसी समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों को अधिक प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए क्यों कि बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में यातायात प्रभावित रहता हैं जलभराव के कारण वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ाता हैं जबकि कई स्थानों पर घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती हैं जिसके चलते श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भी आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा अब लोगों की निगाहें प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं और उनका साफ तौर पर कहना है कि धार्मिक नगरी मथुरा की पहचान केवल विकास योजनाओं की घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाली व्यवस्थाओं से बनती है।

ऐसे में आवश्यकता है कि जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त किया जाए, ताकि हर बारिश में शहर को जलभराव और अव्यवस्था का सामना न करना पड़े

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