उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले 'स्कूल चलो अभियान' के तहत तीन वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा बाल वाटिका से और छह वर्ष से अधिक आयु का कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर नहीं रहना चाहिए।
'टीएलपीएस रिपोर्ट-2025' के विमोचन और 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस' संवाद कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षकों से कहा कि शिक्षा में वास्तविक सुधार केवल नीतियां बनाने से नहीं, बल्कि कक्षा-कक्ष में बेहतर शिक्षण पद्धति अपनाने से संभव होगा। उन्होंने स्कूलों में नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने निर्देश दिए कि कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 में सभी विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहें, उनके अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें दोबारा विद्यालय से जोड़ा जाए। साथ ही सत्र की शुरुआत से ही 'कैच-अप लर्निंग' के माध्यम से कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
सरकार ने 'निपुण उत्तर प्रदेश' कार्यक्रम का दायरा भी बढ़ाते हुए अब इसे कक्षा 3 से 5 तक लागू करने का निर्णय लिया है। शिक्षकों को विद्यार्थियों की प्रगति की नियमित समीक्षा कर उसका विवरण अभिभावकों के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही बच्चों में स्वतंत्र पठन, लेखन, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने पर भी विशेष बल दिया गया।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से ही शिक्षा में व्यापक सुधार संभव है। शिक्षक संकुल बैठकों में नवाचार, सफल शिक्षण पद्धतियों और व्यावहारिक अनुभवों को साझा कर शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाएगा।