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Thursday, 04 Jun 2026
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कूड़े के ढेर पर भोजन तलाश रहा गोवंश, आखिर कैसे मिलेगा गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा?

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में गोवंश की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। वहीं सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर गौशालाओं का संचालन भी किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।

मथुरा शहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गायें कूड़े के ढेरों पर भोजन तलाशने को मजबूर हैं। आरोप है कि गौशालाओं के संचालन और गोवंश के रखरखाव के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद बेसहारा गोवंश सड़कों और कूड़ा घरों में भटक रहा है।

हाल ही में फरह क्षेत्र में दूषित भोजन खाने से कई गायों की मौत का मामला सामने आया था। वहीं यमुना पार क्षेत्र में भी गोवंश की उपेक्षा की तस्वीरें सामने आई थीं। इन घटनाओं ने गौ संरक्षण की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मथुरा रेलवे जंक्शन के गेट नंबर-1 के बाहर का दृश्य भी चिंताजनक है। यहां रेलवे परिसर का कूड़ा एकत्रित कर डाला जाता है और उसी कूड़े के ढेर पर गायें भोजन तलाशती दिखाई देती हैं। यह स्थान ऐसा है जहां प्रतिदिन हजारों यात्रियों के साथ-साथ वीआईपी लोगों का भी आवागमन रहता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय गायों की यह स्थिति है, तो देशभर में गोवंश संरक्षण के दावों की वास्तविकता क्या है? एक ओर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठन गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गोवंश को पर्याप्त भोजन, आश्रय और देखभाल तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

समाजसेवियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बेसहारा गोवंश के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, गौशालाओं की नियमित जांच हो और गोवंश को कूड़े के ढेरों पर भोजन तलाशने की मजबूरी से मुक्त कराया जाए।

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