मथुरा स्थित संस्कृति विश्वविद्यालय के संस्कृति स्कूल ऑफ नर्सिंग में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में विद्यार्थियों ने नर्सिंग पेशे के नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और मानवता के प्रति समर्पण की शपथ ली। समारोह में विद्यार्थियों ने मरीजों की सेवा को सर्वोच्च धर्म मानते हुए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि संस्कृति विश्वविद्यालय की सीईओ डॉ. श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि यह पारंपरिक अनुष्ठान विद्यार्थियों के एक प्रशिक्षु से जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर बनने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमबी चेट्टी ने कहा कि अस्पताल में मरीज सबसे अधिक समय नर्स के साथ बिताता है, इसलिए नर्स मरीज के लिए डॉक्टर से भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय नर्सें दुनियाभर में अपनी सेवा और समर्पण के लिए जानी जाती हैं।
स्टूडेंट वेलफेयर विभाग के डीन डॉ. डीएस तोमर ने कहा कि भारतीय नर्सों की वैश्विक स्तर पर काफी मांग है और उनकी पहचान सेवा भावना से होती है।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने हाथों में दीपक लेकर नाइटिंगेल शपथ ग्रहण की। उन्होंने बिना किसी जाति, धर्म, रंग या राष्ट्र के भेदभाव के जरूरतमंदों और मरीजों की सेवा करने का संकल्प लिया। साथ ही मरीजों की गोपनीयता बनाए रखने और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मिलकर कार्य करने की शपथ भी ली।
कार्यक्रम में संस्कृति स्कूल ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य डॉ. केके पाराशर ने अतिथियों का स्वागत किया। वहीं पूर्व छात्रा शहनाज ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए नर्सिंग पेशे के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।