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Thursday, February 29, 2024

के.डी. मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में भरा संकल्प पत्र

देहदान ही बनाता है बेहतर चिकित्सकः डॉ. आर.के. अशोका

मनुष्य का शरीर जीवित अवस्था ही नहीं मौत के बाद भी अमूल्य है। मृतदेह युवा मेडिकल छात्र-छात्राओं के शोध के काम आती है। मौत के बाद उनका शरीर किसी के काम आ सकता है इस बात को ध्यान में रखते हुए एच-210, कृष्णा ग्रीन छटीकरा रोड, वृंदावन बांगर निवासी कुसुमलता (59) ने के.डी. मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर पहुंच कर देहदान का संकल्प पत्र भरा तथा उसे के.डी. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और डीन डॉ. आर.के. अशोका को सौंपा।


देहदान का संकल्प लेने वाली कुसुमलता का कहना है कि मरने के बाद इंसान की देह तो मिट्टी हो जाती है। यदि यह मिट्टी भी किसी काम आए, तो सच्ची समाजसेवा होगी। आर.के. एज्यूकेशनल ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक मनोज अग्रवाल ने देहदान का संकल्प लेने वाली कुसुमलता की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि इससे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। डॉ. रामकिशोर अग्रवाल ने कुसुमलता के देहदान के संकल्प को अतुलनीय-अनुकरणीय बताते हुए कहा कि चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रत्येक मृतदेह अमूल्य है।


डीन डॉ. आर.के. अशोका का कहना है कि हमारे समाज में देहदान के बारे में जागरूकता का अभाव है। देहदान को प्रोत्साहन देने के लिए फिलहाल जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि मेडिकल छात्र-छात्राओं को शोध करने के लिए डेड बॉडी आसानी मिल सकें। उन्होंने कहा कि देहदान की कमी का सीधा असर चिकित्सा शिक्षा पर पड़ता है। देहदान से बेहतर डॉक्टर तैयार करने में मदद मिलेगी क्योंकि मेडिकल ऑपरेशन में जब भी कोई नई तकनीक आती है, तो उसे सीखने और प्रैक्टिकल कर देखने के लिए मानव बॉडी जरूरी होती है।


डॉ. अशोका का कहना है कि यदि कोई देहदान करना चाहता है तो उसे के.डी. मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष के नाम लिखित में आवेदन करना होगा। एनाटॉमी विभाग की ओर से दानवीर को दो पेज का फार्म निःशुल्क दिया जाता है तथा फार्म में देहदान करने वाले व्यक्ति का नाम, पता, उत्तराधिकारी का नाम तथा दो विटनेस का होना जरूरी है।

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