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Monday, 02 Nov 2026
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राधारानी के दरबार में संतान की आस, रात 12 बजे राधाकुंड में हुआ शाही स्नान

राधारानी के दरबार में संतान सुख की आस... मन में अटूट विश्वास और जुबां पर राधे-राधे का जयकारा! अहोई अष्टमी के पावन पर्व पर विश्वविख्यात तीर्थ राधाकुंड में आधी रात ठीक 12 बजे शाही स्नान हुआ। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने मध्य रात्रि का समय दर्शाया, श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु दंपतियों ने संतान सुख की कामना और अपनी संतान की दीर्घायु के लिए पवित्र राधाकुंड में डुबकी लगाई।

गोवर्धन के राधाकुंड में अहोई अष्टमी का पर्व विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर राधाकुंड में स्नान और पूजा-अर्चना करने से निःसंतान दंपतियों की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। इसी अटूट आस्था को लेकर श्रद्धालु कई दिन पहले से ही राधाकुंड पहुंचने लगे थे।

आधी रात को शाही स्नान शुरू होते ही पूरा तीर्थ क्षेत्र राधारानी के जयकारों से गूंज उठा। कोई संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर पहुंचा था, तो कोई अपनी संतान के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना कर रहा था। श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंड में स्नान कर राधारानी के चरणों में शीश नवाया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और राधारानी के प्रति भक्तों की अटूट आस्था को दर्शाती है। इस पावन अवसर पर राधाकुंड का कोना-कोना भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

श्रद्धालुओं के लिए यह शाही स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संतान सुख की अभिलाषा, परिवार की खुशहाली और राधारानी के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक बना।

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