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Wednesday, 28 Oct 2026
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संस्कृति विश्वविद्यालय में सुशासन पर जोर, लंबित मामलों और शिकायतों के निस्तारण के लिए विशेष अभियान शुरू

मथुरा के संस्कृति विश्वविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए निवारक सतर्कता अभियान-2026 की शुरुआत की गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू किए गए इस अभियान में लंबित शिकायतों के निस्तारण, कानूनी मामलों की समीक्षा और संविदा प्रबंधन में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।

संस्कृति विश्वविद्यालय, मथुरा में सुशासन को मजबूत करने की दिशा में विशेष पहल की गई है। निवारक सतर्कता अभियान-2026 के तहत विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इनमें लंबित शिकायतों का निस्तारण, न्यायालयों में विचाराधीन मामलों का समाधान और खरीद एवं संविदा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता शामिल है।

विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्ट्रार मनीष जी ने बताया कि विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत शिकायतों का विधिवत पंजीकरण कर निष्पक्ष और गोपनीय जांच सुनिश्चित की जाएगी।

अभियान के अंतर्गत न्यायालयों और वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष लंबित कानूनी मामलों की नियमित समीक्षा भी की जाएगी। इसके लिए विशेष विधि प्रकोष्ठ यानी लीगल सेल को सक्रिय किया गया है, ताकि आवश्यक कानूनी कार्रवाई निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जा सके।

वहीं, प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खरीद प्रक्रियाओं, निविदाओं और विक्रेताओं के चयन में निष्पक्षता बरतने पर जोर दिया गया है। सामान और सेवाओं की आपूर्ति तथा संबंधित नियमों के सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पूरे अभियान की निगरानी के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा। यह अधिकारी विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सुधारात्मक कार्यों की प्रगति पर नजर रखेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपेंगे।

कार्यक्रम में संस्कृति स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस मैनेजमेंट के डीन डॉ. गंगाधर हुगर भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस अभियान से संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

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