Please wait we are preparing awesome things...

Wednesday, 28 Oct 2026
ई-पेपर संस्करण
www.abhinews.co.in
उत्तर प्रदेश संस्करण
PAGE - 01
वृंदावन में धूमधाम से निकली प्रभु श्रीराम की भव्य बारात, 8 घंटे में जनकपुरी पहुंचे श्रीराम

धर्मनगरी वृंदावन में श्रीरामलीला महोत्सव के दौरान प्रभु श्रीराम की भव्य बारात धूमधाम से निकाली गई। बैंड-बाजों, काली माता के स्वरूपों और छह दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियों से सजी बारात में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जगह-जगह पुष्पवर्षा और आरती के साथ बारात का स्वागत किया गया। करीब चार किलोमीटर की दूरी तय कर प्रभु श्रीराम की बारात आठ घंटे बाद देर रात एक बजे जनकपुरी पहुंची, जहां सीता-राम विवाह की रस्मों का भव्य मंचन किया गया।

वृंदावन में श्रीरामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन गोपीनाथ बाजार स्थित भागवत निवास से प्रभु श्रीराम की भव्य बारात निकाली गई।

बारात में बैंड-बाजों की मधुर धुन, काली माता के स्वरूप और छह दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। प्रभु श्रीराम की बारात के दर्शन के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नगरवासियों ने जगह-जगह आरती उतारकर और पुष्पवर्षा कर बारात का स्वागत किया।

श्रद्धालुओं के उत्साह और जगह-जगह हुए भव्य स्वागत के चलते करीब चार किलोमीटर की बारात को जनकपुरी पहुंचने में आठ घंटे का समय लगा। देर रात एक बजे बारात विद्यापीठ चौराहा स्थित जनकपुरी पहुंची।

बारात के रंग जी मंदिर पहुंचने पर मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों को प्रसादी चंदन लगाया गया। इसके बाद जनकपुरी में परंपरागत रस्मों का आयोजन हुआ। यहां लड्डू फेंकने और हंसी-ठिठोली की रस्म ने माहौल को और भी आनंदमय बना दिया।

इसके बाद सीता जी और उनकी बहनों द्वारा प्रभु श्रीराम सहित चारों भाइयों को वरमाला पहनाने की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति और उल्लास में सराबोर नजर आए।

प्रभु श्रीराम की भव्य बारात और विवाह प्रसंग ने वृंदावन में धार्मिक उत्सव की छटा बिखेर दी। महाआरती के साथ रामलीला महोत्सव के पांचवें दिन के कार्यक्रम का समापन हुआ।

Previous News

एससी-एसटी मुकदमा वापस न लेने पर युवक को मारी गोली, आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर

Next News

ब्रजरज उत्सव में ‘रूट्स नादात्म बैंड’ एवं शिवोहम प्रोडक्शन के कलाकारों बांधा समां