उत्तर प्रदेश के मथुरा में आशा संगिनियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ कार्यालय पर आशा कार्यकर्ती संगिनी श्रमिक संघ के बैनर तले 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। आशा संगिनियां न्यूनतम 28 हजार रुपये मासिक वेतन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय नहीं मिल रहा है।
धरने का नेतृत्व कर रहीं उत्तर प्रदेश एटक की उपाध्यक्ष उषा शर्मा ने सरकार पर उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्तियां गर्मी, सर्दी, दिन और रात की परवाह किए बिना जनता की सेवा में जुटी रहती हैं। घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने और सरकारी अभियानों को सफल बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें मात्र साढ़े तीन हजार रुपये मानदेय मिलने की बात कही गई, जिससे वर्तमान महंगाई में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो रहा है।
धरने पर बैठीं आशा कार्यकर्ती निधि शर्मा ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्तियां सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए लगातार काम करती हैं और घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें उनके काम के अनुरूप पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
वहीं, जिला अध्यक्ष कुसुम देवी ने मांग की कि आशा और संगिनी कार्यकर्तियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक सभी कार्यकर्तियों को कम से कम 28 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।