धर्मनगरी वृंदावन में विजयादशमी के पावन पर्व पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में साधु-संतों ने विधि-विधान से शस्त्रों की पूजा-अर्चना की। इस दौरान महामंडलेश्वर मां ध्यानमूर्ति महाराज ने कहा कि सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए शास्त्र और शस्त्र दोनों का अपना महत्व है। संतों ने ज्ञान और विवेक के लिए शास्त्रों के अध्ययन के साथ आत्मरक्षा, अनुशासन और साहस के लिए शस्त्र विद्या के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया।
विजयादशमी के अवसर पर ललित कुंज आश्रम में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शस्त्र पूजन किया गया। इस दौरान साधु-संतों ने पूजा-अर्चना कर धर्म, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम में सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई।
महामंडलेश्वर मां ध्यानमूर्ति महाराज ने कहा कि शास्त्र मनुष्य को ज्ञान, विवेक और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, जबकि शस्त्र विद्या आत्मरक्षा और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए दोनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में महंत मोहिनी शरण बिहारी और महामंडलेश्वर अधिकारी गुरु महाराज सहित अन्य संतों ने भी अपने विचार रखे। संतों ने अनुयायियों से धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, अपनी संस्कृति से जुड़े रहने और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।
विजयादशमी पर वृंदावन के ललित कुंज आश्रम में हुआ शस्त्र पूजन धार्मिक आस्था, परंपरा और अनुशासन का संदेश देने वाला आयोजन रहा। संतों ने शास्त्रों से ज्ञान और शस्त्र विद्या से आत्मरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए सनातन संस्कृति के संरक्षण की अपील की।