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Monday, 05 Oct 2026
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर गोस्वामी तुलसीदास के जीवन प्रसंगों का हुआ जीवंत मंचन

श्री रामलीला सभा के तत्वावधान में श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित लीला मंच पर रविवार को गोस्वामी तुलसीदास के जीवन चरित्र पर आधारित लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के दौरान तुलसीदास के वैवाहिक जीवन से लेकर प्रभु श्रीराम के दर्शन प्राप्त होने तक के प्रसंगों को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

लीला की शुरुआत तुलसीदास और उनकी पत्नी रत्ना के वैवाहिक जीवन के प्रसंग से हुई। रत्ना के भाई शंकर दत्त सावन के महीने में उन्हें अपने मायके बद्रिका वन ले जाने के लिए तुलसीदास से अनुमति मांगते हैं। काफी आग्रह के बाद तुलसीदास रत्ना को कुछ दिनों के लिए मायके जाने की अनुमति देते हैं।

इसके बाद लीला में तुलसीदास के पत्नी के प्रति अत्यधिक मोह का प्रसंग दिखाया गया। रत्ना के मायके जाने के बाद तुलसीदास जब वहां पहुंचते हैं तो उन्हें जिस प्रकार कठिन परिस्थितियों को पार कर पत्नी के कक्ष तक पहुंचते हुए दिखाया गया, उसने दर्शकों को भावुक कर दिया।

इसी दौरान रत्ना के मुख से निकले प्रसिद्ध वचन—

“अस्थि चर्ममय देह मम, तामें ऐसी प्रीति।
जो कछु होती राम में, तौ न होति भव भीति।।’’

ने तुलसीदास के जीवन की दिशा बदल दी। इन शब्दों ने उनके मन को झकझोर दिया और उनका मोह प्रभु श्रीराम की भक्ति में परिवर्तित होने का प्रसंग मंच पर बेहद प्रभावशाली रहा।

हनुमानजी के माध्यम से हुआ प्रभु श्रीराम के दर्शन का मार्ग

लीला में इसके बाद तुलसीदास के प्रभु श्रीराम के दर्शन की अभिलाषा का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। बदरी के पेड़ पर रहने वाले प्रेत द्वारा उन्हें बताया जाता है कि श्रीराम कथा में सबसे पीछे बैठने वाले एक अत्यंत दीन-दुखी और वृद्ध व्यक्ति वास्तव में पवन पुत्र हनुमानजी हैं।

तुलसीदास हनुमानजी के चरण पकड़कर प्रभु श्रीराम के दर्शन कराने की प्रार्थना करते हैं। हनुमानजी उन्हें नदी के तट पर चंदन घिसकर प्रभु की प्रतीक्षा करने का उपाय बताते हैं।

इसके बाद नदी किनारे बैठे तुलसीदास के सामने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण राजकुमार के रूप में प्रकट होते हैं और उनसे चंदन लगाने को कहते हैं। तुलसीदास द्वारा प्रभु को चंदन लगाने और श्रीराम के दर्शन प्राप्त करने का दृश्य लीला का मुख्य आकर्षण रहा। इस भावपूर्ण प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से भर दिया।

प्रसाद सेवा और पदाधिकारियों की मौजूदगी

लीला के अवसर पर अनिल अग्रवाल एवं गौरव अग्रवाल प्रेस वाले द्वारा प्रसाद सेवा की गई। कार्यक्रम में श्री रामलीला सभा के नीति निदेशक गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी, सभापति जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, उपसभापति जुगलकिशोर अग्रवाल, नन्दकिशोर अग्रवाल, महामंत्री मूलचन्द गर्ग, मंत्री प्रदीप सर्राफ पी.के., विजय सर्राफ किरोड़ी, कोषाध्यक्ष शैलेष अग्रवाल सर्राफ, आय-व्यय निरीक्षक अजय मास्टर सहित सभा के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

इसके अलावा महावीर मित्तल, प्रेम सर्राफ, सौरभ बंसल, सोहन लाल शर्मा, महेश चंद एडवोकेट, सुभाष सिक्का, योगेंद्र चतुर्वेदी, सुनील अग्रवाल, पिन्कल वर्मा, मनीष गर्ग, बबलू अटैची, अनिल खंडेलवाल, मदन मोहन श्रीवास्तव, हरिओम मांट, कृष्ण मुरारी नेताजी, योगेश गोयल, रोहित राधेगैस, मुकेश अग्रवाल, अमन कुमार, रामदास चतुर्वेदी, विवेक सूतिया, सौरभ अग्रवाल, राजनारायण गौड़, राजीव शर्मा, नमन कुमार, नितिन शर्मा, विष्णु शर्मा, रामगोपाल शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

आज होगा शिव-पार्वती विवाह का मंचन

श्री रामलीला सभा के प्रचार मंत्री पं. शशांक पाठक ने बताया कि 5 अक्टूबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान लीला मंच पर शिव-पार्वती विवाह की लीला का मंचन किया जाएगा। लीला का आयोजन सायं 7 बजे से होगा।

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