वृंदावन। प्रेमानंद बाबा के आश्रम से जुड़े बच्चों की कथित गुमशुदगी और उनके परिवारों से दूर रहने को लेकर अब बाल संरक्षण आयोग से जांच की मांग की गई है। फलाहारी महाराज ने बाल आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ बच्चे धार्मिक भक्ति से प्रभावित होकर बिना माता-पिता को बताए घर छोड़कर वृंदावन पहुंच जाते हैं। इसके बाद उनके परिवारजन अपने बच्चों की तलाश में वृंदावन आते हैं और उन्हें खोजते रहते हैं। परिजनों को बच्चों से दूर रहने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।
फलाहारी महाराज ने पत्र में नाबालिग बच्चों की दीक्षा पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि कम उम्र में बच्चों के घर से दूर रहने से उनकी शिक्षा भी प्रभावित हो सकती है और उनके भविष्य को लेकर परिवारों के सामने चिंता खड़ी हो सकती है।
उन्होंने बाल संरक्षण आयोग से मांग की है कि आश्रम में रहने वाले नाबालिग बच्चों की स्थिति और उनके वहां पहुंचने की परिस्थितियों की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा प्रभावित न हो।
पत्र के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार और बाल संरक्षण आयोग से यह मांग भी की गई है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा अपने परिवार से अलग होकर आश्रम में रह रहा है, तो उसके मामले की नियमानुसार जांच की जाए और आवश्यक होने पर उसे उसके माता-पिता या वैध अभिभावक को सौंपने की कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में बाल संरक्षण आयोग की ओर से जांच या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।