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माँ नन्दा की डोली पहुँची ननिहाल देवराड़ा, भक्ति और सम्मान के साथ संपन्न हुई ऐतिहासिक यात्रा

उत्तराखंड की ऐतिहासिक और आस्था की प्रतीक माँ नन्दा जात यात्रा का भावपूर्ण समापन हो गया है। परगना बधाण की देव डोली अपनी वापसी यात्रा के अंतिम पड़ाव सिद्धपीठ धाम देवराड़ा पहुँची, जहाँ माँ नन्दा परंपरा के अनुसार छह माह के लिए अपने ननिहाल में विराजमान हुईं। इस दौरान चमोली पुलिस के सेवा, सुरक्षा और समर्पण को मंदिर समिति और व्यापार मंडल ने सम्मानित किया। देखिए हमारे संवाददाता विनोद पांडे की यह रिपोर्ट।

ढोल-दमाऊं की गूंज, जयकारों की स्वर लहरियाँ और हजारों श्रद्धालुओं की भावनाओं के बीच माँ नन्दा की डोली जैसे ही भेंटा गाँव पहुँची, पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पँवार सहित पुलिस अधिकारियों का फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया।

पुलिस अधीक्षक और अधिकारियों ने माँ नन्दा के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा जनपद में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। चमोली पुलिस ने श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण भी किया, जहाँ स्वयं पुलिस अधीक्षक और अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर सेवा का संदेश दिया।

दुर्गम पहाड़ी रास्तों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच पूरी यात्रा के दौरान चमोली पुलिस ने सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।

यात्रा में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए अपर पुलिस अधीक्षक आशीष भारद्वाज और पुलिस उपाधीक्षक सुशील रावत को पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं केन्द्रीय समिति श्री माँ नन्दा देवी राजराजेश्वरी नंदाक बधाण देवराड़ा ने भी ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया।

थाना थराली में आयोजित सम्मान समारोह में व्यापार मंडल थराली ने भी यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में चमोली पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए।

पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पँवार ने कहा कि माँ नन्दा जात यात्रा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास की सुरक्षा का दायित्व भी है। उन्होंने स्थानीय समितियों, ग्रामीणों और व्यापारियों के सहयोग को यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया।

परंपरा के अनुसार माँ नन्दा अब अपने ननिहाल सिद्धपीठ धाम देवराड़ा में छह माह तक विराजमान रहेंगी। डोली के अंतिम पड़ाव पर श्रद्धालुओं की आँखों में आस्था, भावुकता और माँ नन्दा के प्रति अटूट श्रद्धा साफ दिखाई दी।

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