राधाष्टमी जन्मोत्सव के उपरांत चल रही ब्रज की प्राचीन बूढ़ी लीलाओं की श्रृंखला में सोमवार को विलासगढ़ पर्वत स्थित प्राचीन रासमंडल चबूतरे पर जोगिन लीला का मनमोहक मंचन हुआ। भगवान श्रीकृष्ण ने जोगिन का वेश धारण कर राधारानी के दर्शन किए और उनका भाग्य बांचने की अद्भुत लीला ने हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
लीला के अनुसार श्रीकृष्ण जोगिन का रूप धरकर राधा के द्वार पहुंचे, जहां ललिता और विशाखा सखियों ने उन्हें राधारानी के दरबार तक पहुंचाया। जोगिन ने राधा की हथेली देखकर मुस्कुराते हुए भविष्यवाणी की— “तुम्हारा विवाह नंद के लाला से होगा।” यह सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए।
कुछ ही क्षण बाद जब जोगिन की वास्तविक पहचान श्रीकृष्ण के रूप में सामने आई तो राधारानी ने प्रेमपूर्वक अपने हाथों से उन्हें लड्डू खिलाए। इस भावपूर्ण प्रसंग ने पूरे वातावरण को कृष्णमय बना दिया
लीला के समापन पर मयूर लीला और युगल नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरा विलासगढ़ पर्वत “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा और ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा एक बार फिर सजीव हो उठी