मथुरा की पावन धरा पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास अपने चरम पर है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बाहर आस्था का ऐसा महासागर उमड़ा है, जहां लाखों श्रद्धालु कान्हा के रंग में रंगे दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह भजन, संकीर्तन, रासलीला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे जन्मभूमि परिसर को भक्तिमय बना दिया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बाहर बने छोटे-छोटे मंचों पर लगातार भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कहीं कलाकार कान्हा के भजनों की मधुर प्रस्तुति दे रहे हैं तो कहीं श्रद्धालु ढोल-मंजीरों की थाप पर झूमते हुए भक्ति नृत्य कर रहे हैं।
देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालु इन कार्यक्रमों को देखकर मंत्रमुग्ध नजर आ रहे हैं। जैसे ही “जय श्रीकृष्ण” और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे गूंजते हैं, पूरा परिसर भक्तिरस में डूब जाता है और श्रद्धालु स्वतः ही नृत्य और कीर्तन में शामिल हो जाते हैं।
जन्मभूमि के आसपास का हर मार्ग, हर चौक और हर मंच कृष्णमय दिखाई दे रहा है। भजन, संगीत, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का माध्यम बनी हुई हैं, जिससे पूरा ब्रजधाम कान्हा की भक्ति और उत्सव के रंग में सराबोर हो उठा है।