राजस्थान के कोटा में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बाबा और साधु का वेश धारण कर लोगों को अंधविश्वास के जाल में फंसाता था। आरोपी पहले अनहोनी का डर दिखाते, फिर कथित तौर पर हिप्नोटाइज कर नकदी और जेवरात लेकर फरार हो जाते थे। पुलिस ने गिरोह के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कोटा पुलिस के मुताबिक यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। आरोपी साधु या बाबा का भेष धारण कर राह चलते लोगों से बातचीत शुरू करते, उन्हें रुद्राक्ष देते और कहते कि यदि उन्होंने भेंट नहीं चढ़ाई तो उनके साथ कोई बड़ा अनर्थ हो जाएगा। डर और अंधविश्वास का माहौल बनाकर वे पीड़ितों को अपने प्रभाव में ले लेते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब रामपुरा कोतवाली क्षेत्र के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि दो बाबा उसके पास आए, रुद्राक्ष दिया और अनहोनी का भय दिखाकर उससे 5,500 रुपये ठग लिए। बाद में उसे एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है, जिसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की और दो आरोपियों विट्ठलनाथ और गोविंद राणा, जो पंजाब के बठिंडा के रहने वाले हैं, को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से इसी तरीके से लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस के अनुसार आरोपी पहले इलाके की रेकी करते और फिर ऐसे लोगों को चुनते जो आसानी से अंधविश्वास के प्रभाव में आ सकते थे। महिलाओं को भी यह गिरोह अपना शिकार बनाता था।
एडिशनल एसपी सुभाष मिश्रा ने बताया कि शुरुआती जांच में इस गिरोह के कई जिलों में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कोटा के दादाबाड़ी और अनंतपुरा थाना क्षेत्रों में हुई इसी तरह की अन्य ठगी की घटनाओं में भी इन आरोपियों की भूमिका रही है या नहीं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अजनबी बाबा, तांत्रिक या साधु के झांसे में न आएं। यदि कोई व्यक्ति चमत्कार, अनहोनी या डर का सहारा लेकर पैसे, गहने या कीमती सामान मांगता है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें और सतर्क रहें।