चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे किया गया, विपक्ष ने बिल को बताया 'सरकार की विफलता का स्मारक', सरकार ने कहा- छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर बहुप्रतीक्षित चर्चा शुरू हो गई। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर जोरदार बहस देखने को मिली। विपक्ष ने जहां बिल को सरकार की नाकामी का प्रतीक बताया, वहीं सरकार ने कहा कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए लाया गया है। चर्चा के लिए तय छह घंटे का समय बढ़ाकर दस घंटे कर दिया गया।
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। स्पीकर ओम बिरला ने सभी दलों की सहमति के बाद चर्चा का समय छह घंटे से बढ़ाकर दस घंटे कर दिया। यह विधेयक 2024 के कानून को और अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह कानून सरकार की विफलता का स्मारक है। उन्होंने दावा किया कि पहले के कानून के बावजूद कई आरोपियों को जमानत मिल गई और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून के जरिए पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली में शामिल लोगों के खिलाफ और अधिक कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रस्तावित संशोधन में संगठित पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामलों में कड़ी सजा, तेज जांच, विशेष टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में जनता और छात्रों का भरोसा मजबूत करेगा, जबकि विपक्ष ने इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं।