यह मामला हरियाणा के पानीपत स्थित जीटी रोड के पार्क अस्पताल का है। शिकायत के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात की रहने वाली गुड्डी देवी सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं, जिसमें उनके पैर की हड्डी टूट गई थी। इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने पहले पैर का ऑपरेशन करने की बात कही।
परिजनों का आरोप है कि अगले ही दिन डॉक्टरों ने उन्हें बिना बताए महिला की एंजियोप्लास्टी कर दी और दिल में स्टेंट डाल दिया। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए न तो परिवार से अनुमति ली गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई। आरोप यह भी है कि सहमति पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए।
परिवार का कहना है कि कथित तौर पर अनावश्यक मेडिकल प्रक्रिया के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बेटे कुलदीप ने सवाल उठाया कि जब उनकी मां अस्पताल में पैर की हड्डी के इलाज के लिए भर्ती हुई थीं, तो आखिर दिल का ऑपरेशन क्यों किया गया।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाने और धमकाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब उन्होंने ऑपरेशन और इलाज को लेकर सवाल पूछे तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर सेक्टर-29 थाना पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने महिला के शव का पोस्टमॉर्टम कराया है और मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज तथा सहमति पत्र की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारण और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
हालांकि, इस मामले में अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल का कहना है कि ऑपरेशन से पहले जांच में महिला की दो हृदय धमनियां ब्लॉक मिली थीं और इसी वजह से चिकित्सकीय आवश्यकता के आधार पर स्टेंट डाला गया। अस्पताल का दावा है कि यह प्रक्रिया परिजनों की सहमति से की गई थी।
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही सामने आएगी। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।