गुरुग्राम। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को सोमवार को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 26 दिन तक चले उनके अनशन के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज किया। अस्पताल से निकलने के बाद वांगचुक सबसे पहले राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनके लद्दाख लौटने का कार्यक्रम है।
सोनम वांगचुक ने अस्पताल से बाहर आने के बाद कहा कि अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है और शरीर धीरे-धीरे ताकत हासिल कर रहा है। उन्होंने अपने समर्थन में खड़े हुए लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान देशभर से मिले सहयोग ने उन्हें हौसला दिया।
मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि डिस्चार्ज के समय सोनम वांगचुक पूरी तरह सचेत, स्थिर और सामान्य स्वास्थ्य मानकों में थे। डॉक्टरों ने उन्हें नियमित फॉलो-अप और आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श का पालन करने की सलाह दी है। इलाज के दौरान उनकी देखभाल इंटरनल मेडिसिन, क्रिटिकल केयर और अन्य विशेषज्ञ विभागों की संयुक्त टीम ने की।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन अनशन किया था। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर 21 जुलाई को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया था।
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन देशभर में चर्चा का विषय बना रहा। अस्पताल से स्वस्थ होकर बाहर आने के बाद उन्होंने एक बार फिर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संवाद और जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया।