रिपोर्ट - पवन शर्मा/आकाश शर्मा
मथुरा में मानसून की बारिश ने जहां भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत दी, वहीं शहर की बदहाल व्यवस्थाओं की भी पोल खोलकर रख दी। इंद्रदेव मेहरबान हुए तो बृजवासियों के चेहरे जरूर खिल उठे, लेकिन शहर की सड़कों पर समंदर जैसा नजारा देख अधिकारियों के भी पसीने छूट गए।
मथुरा में हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। भूतेश्वर पुल, होली गेट, नया बस स्टैंड, घीया मंडी, डीग गेट, कृष्णा नगर सहित कई क्षेत्रों में सड़कें पानी में डूब गईं। लोगों को घंटों जाम, जलभराव और आवागमन की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई जगह दोपहिया और चारपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, जबकि राहगीरों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और व्यापारियों को झेलनी पड़ी।
बारिश के साथ ही नगर निगम की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हो गए। मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी के दावे कागजों तक सीमित नजर आए। हालात ऐसे बने कि कई इलाकों में पानी घंटों तक नहीं निकला और लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते दिखाई दिए।
शहर के कई स्थानों पर जलभराव के बीच खुले मैनहोल, झुके हुए बिजली के पोल और लटकते तार भी लोगों के लिए खतरा बने रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
फिलहाल बारिश से मौसम भले ही सुहाना हो गया हो, लेकिन शहर की बदहाल व्यवस्था ने यह साफ कर दिया है कि मानसून की पहली तेज बारिश में ही प्रशासनिक तैयारियों की हकीकत सामने आ गई। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इन समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक कर पाते हैं।