चुनाव के दौरान मेट्रो में नहीं दिखेंगे राजनीतिक विज्ञापन, दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी आचार संहिता (MCC) लागू रहने के दौरान दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों में राजनीतिक विज्ञापनों पर लगी रोक को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह प्रतिबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है तथा इससे विज्ञापन एजेंसियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता।
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने विज्ञापन एजेंसियों की अपील खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक विज्ञापनों पर यह रोक केवल सीमित अवधि के लिए लागू होती है और एजेंसियां इस दौरान अन्य सभी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन प्रदर्शित कर सकती हैं। इसलिए इसे व्यवसाय या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी माना कि मेट्रो स्टेशन और ट्रेनें आम जनता की नजर में सरकार से सीधे जुड़ी सार्वजनिक संपत्तियां हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान वहां राजनीतिक विज्ञापन प्रदर्शित होने से सरकारी संस्थानों की तटस्थता पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कारण चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों को वैध और जनहित में बताया गया।
यह मामला उन विज्ञापन कंपनियों द्वारा दायर किया गया था, जिन्होंने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के साथ लंबे समय के विज्ञापन अनुबंध किए थे। कंपनियों का तर्क था कि बस स्टॉप और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक विज्ञापन की अनुमति है, इसलिए मेट्रो में रोक भेदभावपूर्ण है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मेट्रो और अन्य सार्वजनिक विज्ञापन स्थलों की प्रकृति अलग है, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती।