उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई MBA छात्रा बबीता पांडे का 19 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद पुलिस, प्रशासन और बचाव एजेंसियां अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी हैं। यह मामला अब एक रहस्य बनता जा रहा है और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बबीता पांडे 29 मई को अपने दो दोस्तों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। बताया गया कि गोई बेस कैंप में रात के दौरान वह अचानक लापता हो गईं। इसके बाद पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP, वन विभाग और स्थानीय लोगों की मदद से बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और अन्य आधुनिक संसाधनों का भी उपयोग किया गया, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली।
जांच एजेंसियों ने अब मामले की जांच का फोकस मोबाइल सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि हर संभावित एंगल से जांच की जा रही है और उपलब्ध सूचनाओं का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।
इस बीच स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में प्रचलित लोककथाओं के आधार पर कुछ लोग यह तक कह रहे हैं कि बबीता को "परियां ले गईं"। हालांकि विशेषज्ञों और स्थानीय ट्रैकर्स ने ऐसी बातों को अंधविश्वास बताते हुए खारिज किया है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
मामले की जांच के दौरान ट्रेकिंग परमिट को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच में कथित तौर पर फर्जी परमिट के इस्तेमाल की बात सामने आई, जिसके बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस बबीता के साथ गए दोनों साथियों से भी पूछताछ कर चुकी है और हर पहलू की गहन जांच कर रही है।
फिलहाल परिजन किसी सकारात्मक खबर की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार तलाश में जुटी हुई हैं। 19 दिन बीत जाने के बाद भी बबीता पांडे का कोई सुराग न मिलना इस मामले को और अधिक रहस्यमयी बना रहा है।